दुष्काल वाले इलाकों के दसवीं-बारहवीं के छात्रों की बोर्ड परीक्षा फीस पूरी तरह माफ
महाराष्ट्र सरकार और बोर्ड ने 265 दुष्काल प्रभावित तालुकों के छात्रों से दसवीं-बारहवीं की परीक्षा फीस न लेने का फैसला किया है।
महाराष्ट्र में स्कूलों और जूनियर कॉलेजों में दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के ऑनलाइन फॉर्म तेजी से भरे जा रहे हैं। इसी बीच राज्य सरकार और महाराष्ट्र बोर्ड ने छात्रों और पालकों के लिए एक अहम घोषणा की है। दुष्काल वाले इलाकों के छात्रों को अब पहले फीस भरकर बाद में उसके वापस मिलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने परीक्षा शुल्क सीधे माफ करने और ऑनलाइन फॉर्म भरते समय ही न लेने का बड़ा फैसला किया है।
राज्य सरकार के 25 सितंबर 2026 के शासन निर्णय (GR) के मुताबिक महाराष्ट्र के 265 तालुकों में दुष्काल जैसे हालात घोषित किए गए हैं। इसी वजह से सरकार ने इन 265 तालुकों में विशेष बात के तौर पर कई उपाय और रियायतें लागू की हैं। इन्हीं रियायतों का एक हिस्सा यह है कि स्कूली और कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फीस पूरी तरह माफ कर दी गई है।
महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षण मंडल ने एक आधिकारिक परिपत्र जारी किया है। उसके मुताबिक फरवरी-मार्च 2027 में होने वाली दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में बैठने वाले दुष्काल प्रभावित इलाकों के छात्रों से अगला आदेश आने तक कोई परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। उनके ऑनलाइन आवेदन बिना फीस के भरवाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बारे में और विस्तार से मार्गदर्शक सूचनाएं राज्य मंडल की तरफ से जल्दी ही अलग से जारी की जाएंगी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में जोर देकर कहा गया कि छात्रों से पहले फीस वसूलकर बाद में रिफंड करने के बजाय शुरुआत में ही फीस न ली जाए। मंत्रिमंडल की इस चर्चा के बाद शिक्षण मंडल ने फौरन कदम उठाते हुए दुष्काल वाले इलाकों के छात्रों की फीस न लेने का फैसला घोषित कर दिया।
राज्य शिक्षण मंडल ने सभी विभागीय मंडलों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र के दुष्काल प्रभावित तालुकों के सभी स्कूलों और जूनियर कॉलेजों को इस फैसले की तुरंत जानकारी दें और इसे फौरन लागू करवाएं। साथ ही इस बारे में की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट भी राज्य मंडल को जल्द भेजने के आदेश दिए गए हैं।
राज्य में दसवीं और बारहवीं के कुल मिलाकर करीब 32 लाख छात्र हैं। फीस भरकर उसे बाद में वापस पाने की प्रक्रिया में छात्रों और पालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। शिक्षक संगठनों ने भी इसे बंद करने की जोरदार मांग उठाई थी। अभी फॉर्म भरने का काम चल रहा है, इसलिए सही वक्त पर लिए गए इस फैसले से रिफंड की झंझट खत्म हो गई है। इस तरह 32 लाख छात्रों और उनके पालकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है।
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