मनीषा कायंदे का ठाकरे गुट पर वार: मीनाक्षी शिंदे पर आरोप साबित करने की चुनौती
रविवार को ठाकरे बंधुओं ने 'गर्जना मोर्चा' निकालकर चुनाव आयोग के आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस मांग के बाद केंद्र और राज्य की सत्ता में बैठी युति सरकार के नेताओं ने ठाकरे बंधुओं की आलोचना की। एक समय उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी मानी जाने वाली डॉ. मनीषा कायंदे ने भी इस मोर्चे पर अपनी बात रखी और दिशा सालियन मामले पर भी बयान दिया।
मोर्चे पर बोलते हुए कायंदे ने ठाणे में शिवसेना ठाकरे गुट के विभाग प्रमुख प्रदीप पूर्णेकर की हत्या का भी जिक्र किया। पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे पर जो आलोचना हो रही है, उस पर उन्होंने जवाब दिया।
दिशा सालियन की मौत के मामले पर कायंदे ने कहा कि दिशा सालियन के पिता पिछले छह साल से इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। कायंदे ने यह भी बताया कि दिशा सालियन के पिता नोटिस देने के लिए मातोश्री गए थे, और कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
पूर्णेकर हत्याकांड में राजनीतिक नेताओं की तरफ से मीनाक्षी शिंदे पर आरोप लग रहे हैं। कायंदे ने ठाकरे गुट को चुनौती दी कि वह इन आरोपों को साबित करे। किशोरी पेडणेकर पर लगे आरोपों का हवाला देते हुए उन्होंने ठाकरे गुट पर 'चोर मचाये शोर' कहकर टिप्पणी की।
कायंदे के मुताबिक रविवार के गर्जना मोर्चा को इजाजत नहीं थी, फिर भी ठाकरे बंधुओं ने मोर्चा निकाला। उन्होंने कहा कि ठाकरे बंधु शिवाजी पार्क में आंदोलन करने पर अड़े थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आजाद मैदान में आंदोलन करने की सलाह दी थी।
कायंदे ने ईवीएम, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दोष मढ़ने को लेकर भी आलोचना की। उनका आरोप है कि विरोधियों ने हार पर आत्ममंथन करने के बजाय चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और अभिजीत दिपके नौजवानों को भड़का रहे हैं। उनके मुताबिक नौजवानों को नौकरी, शिक्षा और अपनी तरक्की की जरूरत है।
राज्य में लापता लड़कियों का मुद्दा गंभीर है, ऐसा कहते हुए कायंदे ने दावा किया कि 'मुस्कान' मोहिम के जरिए कई महिलाएं और लड़कियां मिली हैं। साथ ही उन्होंने मांग की कि लापता 22 लड़कियों के मामले की गहरी जांच हो और गृह विभाग इस पर तुरंत कार्रवाई करे।
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