दुष्काळ जाहीर, पर मदत कब? काँग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ का सरकार से सवाल
काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने महाराष्ट्र सरकार से दुष्काळग्रस्त किसानों को तुरंत ठोस आर्थिक मदद देने की मांग की है।
महाराष्ट्र में दुष्काळ को लेकर सियासत गरमा गई है। सरकार ने राज्य के बड़े हिस्से में दुष्काळ तो जाहीर कर दिया है, लेकिन किसानों को असल में और भरपूर आर्थिक मदद कब मिलेगी, यह सवाल काँग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि दुष्काळग्रस्त किसानों के बैंक खाते में पहले सीधे मदद जमा की जाए, और पंचनामे की औपचारिकता उसके बाद पूरी की जाए।
सपकाळ ने कहा कि दशहरा-दिवाळी सिर पर है, ऐसे में त्योहारों के मौके पर किसानों के घर में अंधेरा न रहे, इसके लिए सरकार को फौरन फैसला लेना चाहिए। उनकी मुख्य मांग है कि हेक्टर पीछे 1 लाख रुपये का मुआवजा सीधे किसानों के खाते में डाला जाए।
उन्होंने कहा कि दुष्काळ जाहीर करना पहला कदम है, लेकिन असल में कितनी और कब मदद मिलती है, यह ज्यादा अहम है। सपकाळ के मुताबिक सरकार सिर्फ मामूली रियायतें देकर कहीं ऐसी स्थिति न बना दे कि "राजा उदार हुआ, हाथ में कटोरा थमा दिया" जैसा हाल हो जाए।
सपकाळ के अनुसार इस बार खरीप सीजन बड़े पैमाने पर बर्बाद हो चुका है। पानी और जानवरों के चारे की हालत भी गंभीर है। कई गांवों और बस्तियों में पीने के पानी की दिक्कत खड़ी हो गई है, और कुछ शहरों में भी पानी की किल्लत है।
खरीप सीजन हाथ से निकल जाने के बाद अब किसानों की नजरें रब्बी सीजन पर टिकी हैं, लेकिन पानी की उपलब्धता न होने से रब्बी सीजन पर भी संकट मंडरा रहा है, ऐसा सपकाळ ने कहा। इसलिए उन्होंने मांग की कि रब्बी सीजन के लिए बीज और खाद मुफ्त दिए जाएं, फसल कर्जमाफी हो और किसानों को खास आर्थिक मदद दी जाए। साथ ही पशुधन बचाने के लिए पर्याप्त चारा और पशु आहार उपलब्ध कराने की मांग भी उन्होंने रखी।
सपकाळ ने यह भी कहा कि किसान परिवारों के बच्चों की पढ़ाई का सवाल भी गंभीर है। उनकी मांग है कि छात्रों की सिर्फ परीक्षा फीस माफ न करके पूरी शैक्षणिक फीस माफ की जाए, और खेतिहर मजदूरों के लिए अलग से आर्थिक मदद की व्यवस्था की जाए।
इसी दौरान, सत्ताधारी पक्ष के कुछ मंत्रियों पर विरोधकों को टारगेट करने का आरोप लगाते हुए सपकाळ ने कहा कि सरकार ने दुष्काळ जाहीर कर दिया है, इसलिए विरोधकों को सवाल नहीं पूछने चाहिए - यह कहना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार से सवाल पूछना विरोधी दलों का संवैधानिक अधिकार है, और सत्ता में बैठे मंत्रियों को विरोधकों को अक्कल सिखाने की जरूरत नहीं है।
सपकाळ के मुताबिक दुष्काळ की वजह से किसानों और खेतिहर मजदूरों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है, इसलिए देर किए बिना ठोस मदद दी जानी चाहिए। अब सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सबकी नजर टिकी है।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।