मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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15:47 IST

किसानों को तुरंत मदद नहीं, पूरी रिपोर्ट के बाद ही फैसला: चंद्रशेखर बावनकुळे

राज्य में 75 फीसदी सूखा घोषित होने के बाद भी महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा कि पंचनामे पूरे होने तक किसानों को मदद घोषित नहीं होगी।

किसानों को तुरंत मदद नहीं, पूरी रिपोर्ट के बाद ही फैसला: चंद्रशेखर बावनकुळे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

राज्य सरकार ने राज्य में 75 फीसदी सूखा घोषित कर दिया है और सूखा निवारण के लिए महसूल मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे की अध्यक्षता में एक उपसमिति भी बनाई गई है। इससे ऐसा लग रहा था कि किसानों को जल्द आर्थिक मदद मिल जाएगी, लेकिन बावनकुळे ने साफ कर दिया है कि ऐसा तुरंत नहीं होने वाला। यवतमाळ में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब तक पूरी रिपोर्ट नहीं आती, तब तक किसानों को मदद नहीं दी जाएगी, वरना किसानों का ही नुकसान हो सकता है।

बावनकुळे ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि सूखा राहत से एक भी किसान बाहर न रहे। पंचनामे करते वक्त उस इलाके की स्थिति देखकर और राज्य के औसत नुकसान का आकलन करके ही मदद दी जाती है। उनके मुताबिक आज के आज मदद का ऐलान नहीं हो सकता, क्योंकि फसलों के पंचनामे होना जरूरी है और यह देखना जरूरी है कि हालात क्या हैं। तूर, कपास, सोयाबीन, हल्दी, बागवानी और संतरे के लिए अलग-अलग मदद के पैमाने तय हैं। उन्होंने कहा कि किसी ने सुझाव दिया था कि आज ही मदद घोषित कर दी जाए, लेकिन उन्होंने जवाब दिया कि अगर इससे किसानों का नुकसान हुआ तो क्या होगा, इसलिए पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही यह भूमिका तय होगी। पंचनामे के आधार पर ही मदद दी जाती है और मुख्यमंत्री जल्द इसका ऐलान करेंगे, यह बात उन्होंने साफ की।

बावनकुळे ने बताया कि एनडीआरएफ से मदद पाने के लिए पंचनामे सही होना बहुत जरूरी है, तभी किसानों को सही मदद मिल पाएगी। मंत्रिमंडल की उपसमिति सूखे की सटीक स्थिति का ब्यौरा तैयार करेगी और हर मंगलवार को उपसमिति की बैठक होकर सूखे की स्थिति का जायजा लिया जाएगा।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सूखे पर जो राजनीति की जा रही है, वह गलत है। सूखे की मार किसान और खेत मजदूर दोनों पर पड़ रही है, इसलिए सबको मिलकर इसकी गंभीरता समझनी चाहिए और अपने-अपने स्तर पर सहायता निधि में योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों का पहला हक सरकार पर है, इसलिए पंचनामे सटीक होने चाहिए, और यह भी बताया कि उनका दौरा लगातार जारी है।

बिजली को लेकर उन्होंने कहा कि किसानों को 12 घंटे बिजली देने के साफ आदेश महावितरण को दिए गए हैं, क्योंकि बिजली मिलने पर किसान उपलब्ध पानी के भंडार से सिंचाई कर सकते हैं। अगर बिजली नहीं मिल रही, तो इस पर मंत्रिमंडल उपसमिति की बैठक में चर्चा की जाएगी।

शरद पवार द्वारा सूखे को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जाने पर बावनकुळे ने कहा कि पत्र देना विपक्ष के तौर पर उनका काम है, लेकिन सरकार पवार का पत्र आने की वजह से किसानों की मदद नहीं कर रही। उन्होंने बताया कि कई विधायकों ने भी ऐसे पत्र दिए हैं, तीनों पार्टियों के नेताओं ने पत्र भेजे हैं, और अब तक 2000 से ज्यादा पत्र आ चुके हैं। मुख्यमंत्री खुद किसानों के खेतों तक गए थे और उन्होंने फैसला ले लिया है। जो तालुके सूखे की सूची से छूट गए हैं, उनका अध्ययन किया जाएगा, यह भी उन्होंने स्पष्ट किया।

ठाकरे बंधुओं के मोर्चे पर प्रतिक्रिया देते हुए बावनकुळे ने कहा कि इस मामले में चुनाव आयोग पहले ही स्पष्टीकरण दे चुका है, और कुछ लोगों को बस राजनीति करनी है। उन्होंने कहा कि पहले ईवीएम पर शक जताया गया था, अब एसआयआर का मुद्दा उठाया जा रहा है, जबकि एसआयआर करने में कोई गलती नहीं है। विपक्ष पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि वे बूथ पर काम नहीं करते, बूथ लेवल पर घूमते नहीं, सिर्फ शक जताकर आरोप लगाते हैं और नेगेटिविटी फैलाकर चुनाव जीतने की कोशिश करते हैं, जबकि इस तरीके से वोट नहीं मिलते। उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव के वक्त संविधान बदलने का झूठा प्रचार किया गया था, लेकिन अब लोगों को सच्चाई समझ आ गई है, इसीलिए विधानसभा चुनाव में भाजपा को 51 फीसदी वोट मिले और कांग्रेस पार्टी अब घर बैठी है। उन्होंने कहा कि इस देश में सच्चाई ही चलेगी, झूठ नहीं चलेगा।

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