वर्धा के सात तालुके सूखे के ट्रिगर-१ में, पंचनामे जारी, १० अक्टूबर तक रिपोर्ट
खरीफ सीजन में बारिश के लंबे खंड से वर्धा जिले में सूखे जैसे हालात बने हैं। जिला प्रशासन नुकसान के पंचनामे कर रहा है और शासन को रिपोर्ट १० अक्टूबर तक भेजेगा।
इस साल खरीफ सीजन में बरसात के बीचोबीच बारिश गायब हो गई, जिससे वर्धा जिले में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। बारिश के लंबे खंड और कम बरसात का सीधा असर खेतों की फसलों पर पड़ा है। शासन ने करंजा को छोड़कर जिले के बाकी सात तालुकों को सूखे के ट्रिगर-१ में शामिल किया है।
इन हालात को देखते हुए शासन ने जिला प्रशासन को नुकसान के पंचनामे करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद राजस्व, कृषि और ग्रामविकास विभाग के अधिकारी मिलकर युद्धस्तर पर पंचनामे कर रहे हैं। अब तक जिले में ८,८८३ हेक्टेयर क्षेत्र की फसलों के पंचनामे पूरे हो चुके हैं।
शुरुआत में बारिश ने चकमा दिया था। फिर कुछ बरसात हुई तो किसानों ने बुवाई तेज कर दी। लेकिन उसके बाद बारिश फिर गायब हो गई और खरीफ की फसलों का हाल बिगड़ गया।
कृषि विभाग ने शासन की गाइडलाइन के हिसाब से १४ सितंबर तक की बारिश, बारिश के खंड, फसलों की हालत और उत्पादन में संभावित गिरावट जैसे कई पैमानों का अध्ययन किया। इसी अध्ययन के बाद वर्धा जिले के सात तालुकों को सूखे के ट्रिगर-१ में रखा गया।
कृषि विभाग के अंदाज के मुताबिक इस साल जिले में ४ लाख ६ हजार ५५५ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की बुवाई होने की उम्मीद थी। असल में इससे ज्यादा, यानी करीब ४ लाख १९ हजार ५७५ हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की फसलें बोई गई हैं।
इनमें सोयाबीन, कपास और तुअर मुख्य फसलें हैं। सोयाबीन १,१९,७३३ हेक्टेयर में, कपास २,३२,३५३ हेक्टेयर में और तुअर ६०,४१३ हेक्टेयर में है।
कम बारिश और बारिश के खंड से हुए नुकसान की जानकारी प्रशासन जुटा रहा है। राजस्व, कृषि और ग्रामविकास विभाग संयुक्त पंचनामे पूरे करके उनकी रिपोर्ट तैयार करेंगे। जिला प्रशासन नुकसान की पूरी रिपोर्ट १० अक्टूबर तक शासन को सौंपेगा।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी अरविंद उपरिकर ने कहा, "शासन की गाइडलाइन के मुताबिक फसलों के नुकसान के संयुक्त पंचनामे युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। जिले में नुकसान की जानकारी जुटाकर उसे १० अक्टूबर तक शासन को भेजा जाएगा।"
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