CJP ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग दोहराई, 2 अक्टूबर से आंदोलन की चेतावनी
SIR और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी और चुनाव आयोग के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और केंद्रीय चुनाव आयोग के बीच की लड़ाई अब और तीखी होती दिख रही है। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे के अंदर इस्तीफा देने की चेतावनी दी थी। यह डेडलाइन अब खत्म हो चुकी है, लेकिन इस्तीफा नहीं आया।
डेडलाइन खत्म होने के बाद CJP ने अपनी अगली रणनीति का ऐलान करते हुए बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से तैयार रहने की अपील करते हुए कहा है, "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए-कातिल में है... तुम सब तैयारी में लग जाओ, अब सीधे 2 अक्टूबर को मिलेंगे।" अब सबकी नजर इस पर है कि ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की तरफ से इस पर क्या जवाब आता है।
इससे पहले गुरुवार को नई दिल्ली में CJP ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। पार्टी ने कहा था कि अगर 48 घंटे के अंदर इस्तीफा नहीं दिया गया, तो देशभर में आंदोलन शुरू किए जाएंगे। इतना ही नहीं, पार्टी ने आने वाले विधानसभा चुनावों को भी टालने की मांग रखी है।
CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके ने कहा कि उनका संगठन नई दिल्ली के साथ-साथ पूरे देश में आंदोलन करेगा। पार्टी के सह-संयोजक सौरभ दास ने तीन मांगें रखीं: मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, ज्ञानेश कुमार और उन्हें कथित तौर पर निर्देश देने वालों पर आपराधिक कार्रवाई, और आने वाले सभी चुनावों पर रोक लगाई जाए।
इसके अलावा पार्टी ने यह भी मांग की है कि SIR को 2025 की वोटर लिस्ट में फिर से शामिल किया जाए, SIR से जुड़ी सारी फाइलें सुप्रीम कोर्ट की अगुवाई वाली कमेटी की निगरानी में रखी जाएं, और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा कानून रद्द किया जाए।
यह पूरा विवाद एक रिपोर्ट से शुरू हुआ था, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, के बीच SIR और दूसरे फैसलों को लेकर मतभेद थे। इस रिपोर्ट के मुताबिक सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के अलग-अलग फैसलों और कामकाज पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
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