मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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15:46 IST

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का पुणे से नागपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन

भ्रष्टाचार और भाजपा के लिए काम करने के आरोपों में घिरे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने राज्यभर में जिलाधिकारी कार्यालयों के बाहर निदर्शन किया।

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का पुणे से नागपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

केंद्रीय निर्वाचन आयोग में भ्रष्ट कारभार और सत्ताधारी भाजपा के लिए काम करने के आरोपों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार बुरी तरह घिर गए हैं। एसआयआर (SIR) प्रक्रिया में हुई फेरबदल और बाकी दो निर्वाचन आयुक्तों के साथ उनके मतभेदों को लेकर आज कांग्रेस ने पुणे, सोलापुर, नागपुर समेत महाराष्ट्र के बड़े शहरों में राज्यभर प्रदर्शन किए।

पिछले हफ्ते इस बारे में छपी एक रिपोर्ट के बाद पूरे देश में हलचल मच गई थी। आरोप है कि एसआयआर की प्रक्रिया को लेकर 14 बार आपत्तियां दर्ज होने के बावजूद ज्ञानेश कुमार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह आरोप बाकी दो निर्वाचन आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, ने लगाया था। निर्वाचन आयोग के भीतर का यह विवाद सामने आने के बाद ज्ञानेश कुमार पर गंभीर सवाल उठने लगे।

इन्हीं आरोपों के बीच आज पुणे शहर और जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और निर्वाचन आयोग तथा केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रखी। पुणे, सोलापुर, मुंबई, नागपुर जैसे कई बड़े शहरों में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी और विभागीय आयुक्त कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि अगर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ तो यह आंदोलन और तेज किया जाएगा।

कांग्रेस नेता नाना पटोले ने भी हाल ही में निर्वाचन आयोग और भाजपा पर तीखा हमला बोला था। नाना पटोले की कांग्रेस ने इसी आंदोलन के जरिए मांग की कि चुनाव निष्पक्ष माहौल में हों और लोकतंत्र तथा संविधान की रक्षा के लिए ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें, या फिर केंद्र सरकार खुद उन्हें पद से हटाए।

वहीं महाराष्ट्र में भी एसआयआर प्रक्रिया के बाद करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से गायब हैं। हालांकि निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि इस आंकड़े को अंतिम कटौती न माना जाए। इसमें मृत मतदाता, स्थायी रूप से पलायन कर चुके मतदाता और पते पर न मिलने वाले मतदाता शामिल हैं।

इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक रोहित पवार ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में हटाए गए मतदाताओं की संख्या आगे चलकर करीब 3 करोड़ तक पहुंच सकती है। उनका कहना है कि एसआयआर प्रक्रिया की जांच को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।

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