मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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15:46 IST

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा पत्र फर्जी, चुनाव आयोग ने बताया एआई जनरेटेड

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस्तीफे के पत्र को चुनाव आयोग ने बनावटी बताया है, इससे पहले एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों पर देशभर में हंगामा मचा था

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा पत्र फर्जी, चुनाव आयोग ने बताया एआई जनरेटेड
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए इस्तीफे का एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया था, लेकिन चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि यह पत्र बनावटी है। आयोग की ओर से बताया गया कि ऐसा कोई फैसला लिया ही नहीं गया, और वायरल हुआ पत्र एआई जनरेटेड यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाया गया है। आयोग के एक प्रवक्ता के मुताबिक इस फर्जी पत्र पर मुख्य चुनाव आयुक्त के दस्तखत भी थे और यह राष्ट्रपति मुर्मू को संबोधित था, लेकिन लोगों से अपील की गई है कि ऐसे झूठे पत्रों पर भरोसा न करें।

वायरल पत्र में लिखा था, "यह फैसला सोच-समझकर आत्मनिरीक्षण और विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। मुझ पर भरोसा जताने के लिए मैं भारत सरकार और इस महान देश के नागरिकों का आभार जताता हूं। दुनिया की सबसे बड़ी लोकतंत्र की सेवा करने और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता व निष्पक्षता बनाए रखने का मौका मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है।"

दरअसल, हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्तों और मुख्य आयुक्त के बीच मतभेद चल रहे थे। इसमें यह भी कहा गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने कई बार आपत्तियां रखी गईं, लेकिन उन पर गौर नहीं किया गया, और प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज की थी, क्योंकि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना ही जारी कर दिए गए थे। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, और वोटर लिस्ट डेटाबेस पर केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे।

इन खबरों के बाद चुनाव आयोग ने तीनों आयुक्तों के बीच किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट की जांच से जुड़े फैसले हमेशा सर्वसम्मति से ही लिए जाते हैं, और वैचारिक मतभेदों को टकराव नहीं माना जाना चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में जो बदलाव किए गए, उन्हें सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिल चुकी है। आयोग के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में एसआईआर सहित देशभर में कई फैसले लिए गए हैं। 24 जून 2025 को आयोग ने बिहार से शुरुआत करते हुए पश्चिम बंगाल और अन्य 30 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों तक एसआईआर लागू करने का आदेश जारी किया था, और इस आदेश को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली थी।

आयुक्तों के बीच मतभेद और एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी खबरों के बाद कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों ने आयोग के कामकाज पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग की। विपक्ष ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की चेतावनी भी दी और एसआईआर रोककर पिछले चुनाव दोबारा कराने की मांग की।

इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी भी मैदान में उतर आई है। पार्टी ने तीन मांगें रखी हैं और कहा है कि अगर ये पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन किया जाएगा। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो 2 अक्टूबर से मुंबई में आंदोलन शुरू होगा। हालांकि मुंबई पुलिस ने अभी तक इस आंदोलन को इजाजत नहीं दी है। सीजेपी की मांग है कि कुमार इस्तीफा दें, एसआईआर रोका जाए और इस पूरी प्रक्रिया की जांच हो।

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