सूखे में पंचनामे पर अब किसान के दस्तखत जरूरी, कृषि आयुक्तालय का पूरे राज्य को पत्र
कृषी आयुक्तालय ने राज्य भर के कृषी अधिकारियों को पत्र भेजकर नुकसान वाले खेतों के पंचनामे पर किसान के दस्तखत लेना जरूरी कर दिया है।
राज्य में सूखा जैसे हालात के बीच कृषि विभाग ने नुकसान वाले खेतों के पंचनामे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में कृषि आयुक्तालय ने पूरे राज्य के कृषि अधिकारियों को सूचनाएं भेजी हैं। इनमें साफ निर्देश है कि जो भी कृषि पंचनामा किया जाए, उस पर किसान के दस्तखत (Farmer Signature Compulsory) लिए जाएं। इसके लिए कृषि विभाग ने एक प्रपत्र यानी प्रोफार्मा भी जारी किया है।
निर्देशों में एक और बात है। फर्स्ट ट्रिगर के मुताबिक जिन 265 तालुकाओं में सूखा घोषित हुआ है, वहां पंचनामा करते वक्त हर किसान का फार्मर आईडी (ऐग्री स्टैक कार्ड) लिया जाए। जिस किसान के पास फार्मर आईडी नहीं है, उसका आधार कार्ड नुकसान के पंचनामे के लिए मान्य होगा।
मिली जानकारी के मुताबिक पत्र में यह भी कहा गया है कि पंचनामा रिपोर्ट संबंधित विभागीय आयुक्त के जरिए जल्द से जल्द कृषि आयुक्तालय में जमा की जाए। कृषि विभाग के जारी प्रपत्र में किसान का नाम, उसकी प्रभावित फसल, नुकसान का प्रतिशत, फार्मर आईडी या आधार नंबर और किसान के बैंक खाते की पूरी जानकारी भरनी है। सबसे आखिर में पंचनामा पूरा होने के बारे में किसान के दस्तखत लेना अनिवार्य किया गया है।
इस फैसले से पंचनामे में पारदर्शिता आने की बात कही जा रही है और किसान इसका स्वागत कर रहे हैं। पहले भी आसमानी संकट में किसानों का नुकसान होता था और कृषि विभाग पंचनामे करता था। लेकिन उन पंचनामों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप होते थे। हकीकत यह भी थी कि कई जगह कृषि और राजस्व विभाग के कर्मचारी गांव में एक जगह बैठकर पंचनामे करवा लेते थे। अधिकारी हर खेत पर नहीं जाते थे, इसलिए किसानों में नाराजगी रहती थी।
इस साल सूखे की हालत गंभीर है और किसान मुश्किल में है। इसी वजह से दो ही दिन पहले कृषि आयुक्तालय ने पूरे राज्य के कृषि विभाग के दफ्तरों को यह पत्र भेजा। पत्र के साथ एक प्रपत्र भी जोड़ा गया है और इस साल का यह एक अहम बदलाव दिख रहा है। प्रपत्र के आखिरी कॉलम में जिस किसान का पंचनामा हुआ, उसके दस्तखत लेना अनिवार्य किया गया है।
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