विदर्भ में सूखे की मार, नागपुर की सभी 14 तहसीलें शामिल, कुल 265 तहसील सूखाग्रस्त घोषित
कम बारिश के चलते महाराष्ट्र सरकार ने 265 तहसीलों में सूखा घोषित किया, नागपुर जिले की सभी 14 तहसील इसमें शामिल।
महाराष्ट्र में इस साल बारिश कम हुई है, और इसका असर अब सरकारी आंकड़ों में साफ दिख रहा है। राज्य सरकार ने 265 तहसीलों को सूखा या सूखे जैसी स्थिति की सूची में डाल दिया है। इसमें नागपुर जिले की सभी 14 तहसील शामिल हैं, यानी पूरा जिला ही सूखे की चपेट में आ गया है। नागपुर में अब तक औसतन सिर्फ 64.1 फीसदी बारिश दर्ज हुई है।
फसलों को कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन करने के लिए पंचनामे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभी तक जो बारिश हुई है, उसी के आंकड़ों के आधार पर संबंधित तहसीलों को सूखाग्रस्त सूची में रखा गया है।
नागपुर ग्रामीण, कामठी, सावनेर, पारशिवनी, मौदा, भिवापुर, कलमेश्वर, काटोल, रामटेक, हिंगना, उमरेड, कुही और नरखेड़ के अलावा खुद नागपुर शहर में भी औसत से कम बारिश हुई है। सूखा घोषित होते ही जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद ने संबंधित विभागों के अधिकारियों की छुट्टियों पर सख्ती कर दी है और उन्हें मुख्यालय छोड़ने से भी रोक दिया है।
आदेश के मुताबिक राजस्व, कृषि, ग्राम विकास, नगर विकास और भूमि अभिलेख विभाग के जिला और तहसील स्तर के सभी अधिकारियों को मुख्यालय में रहते हुए सूखा राहत, फसल निरीक्षण, ऋण पुनर्गठन और किसानों की मदद से जुड़े कामों को सबसे पहले निपटाना होगा। बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय छोड़ना अब सख्त मना है।
पूरे विदर्भ में देखा जाए तो 95 तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित की गई है। इनमें नागपुर संभाग की 39 और अमरावती संभाग की 56 तहसील शामिल हैं। नागपुर जिले की 14, वर्धा की 7, भंडारा की 3, गोंदिया की 1, चंद्रपुर की 12 और गड़चिरोली जिले की 2 तहसील इस सूची में हैं। वहीं अमरावती संभाग में अमरावती की 14, बुलढाना की 13, अकोला की 7, वाशिम की 6 और यवतमाल की 16 तहसीलों में सूखा घोषित हुआ है।
नागपुर जिले में कपास, सोयाबीन, धान, तुअर और बाकी फसलों की बुआई 94.74 फीसदी तक हो चुकी थी, लेकिन बारिश न होने से खेतों में खड़ी फसल अब सूख रही है। इस खरीफ सीजन में जिले में 4,69,403 हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य था, जिसमें से 4,44,723 हेक्टेयर में बुआई हो पाई। इसमें 2,20,908 हेक्टेयर कपास और 72,536 हेक्टेयर सोयाबीन का रकबा है, जबकि धान 95,031 हेक्टेयर और तुअर 56,993 हेक्टेयर में बोई गई। बाकी फसलें 96,953 हेक्टेयर में लगाई गई थीं। कितने हेक्टेयर में फसल का नुकसान हुआ है, यह पंचनामा पूरा होने के बाद ही पता चलेगा, और इसकी रिपोर्ट जल्द देने के निर्देश दिए गए हैं।
सूखाग्रस्त तहसीलों में कई रियायतें तुरंत लागू कर दी गई हैं। इनमें भूमि राजस्व में छूट, फसल कर्ज का पुनर्गठन, कृषि कर्ज की वसूली पर रोक, 7.5 हॉर्सपावर से ज्यादा क्षमता वाले कृषि पंपों के चालू बिजली बिल में छूट और छात्रों की परीक्षा फीस माफ करना शामिल है। इसके साथ ही मनरेगा के तहत ज्यादा से ज्यादा काम शुरू करने, जरूरत पड़ने पर टैंकरों से पानी पहुंचाने, अनाज की उपलब्धता बनाए रखने, जानवरों के लिए चारे का इंतजाम करने और जल संधारण के काम शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। सूखे से प्रभावित किसानों को फसल नुकसान की आर्थिक मदद तय प्रक्रिया के तहत अलग से घोषित की जाएगी।
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