कांग्रेस का दावा: SIR में पहले दो चरणों में 7.8 करोड़ वोटरों के नाम लिस्ट से गायब
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के SIR कार्यक्रम पर गंभीर सवाल उठाए, कहा कि करोड़ों वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं।
देश भर में चुनाव आयोग ने जो SIR यानी वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन कार्यक्रम शुरू किया है, उस पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि SIR के पहले और दूसरे चरण में करीब 7.8 करोड़ वोटरों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए, जो रिविजन से पहले की वोटर लिस्ट का करीब 13 फीसदी है।
जयराम रमेश के मुताबिक, 2026 में शुरू हुए तीसरे चरण में 12 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों से मिली जानकारी के आधार पर 36.06 करोड़ वोटरों में से 6.18 करोड़ वोटरों के नाम लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं। इसके अलावा 5.43 करोड़ वोटरों को अतिरिक्त कागजात जमा करने के लिए नोटिस भेजे गए हैं।
रमेश का कहना है कि अगर दोनों आंकड़ों को जोड़ा जाए, तो करीब 32 फीसदी वोटर या तो लिस्ट से हटाए जा चुके हैं या उनके नाम हटने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली, चंडीगढ़, तेलंगाना, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, मेघालय, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पंजाब में बड़ी तादाद में वोटर इससे प्रभावित हुए हैं। रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि नाम हटाने की इस पूरी प्रक्रिया का असर आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर तबकों और महिलाओं पर असमान तरीके से पड़ा है।
यह आंकड़े और आरोप कांग्रेस नेता की तरफ से सामने रखे गए हैं, इसलिए इन्हें चुनाव आयोग की स्वतंत्र पुष्टि के तौर पर नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, SIR के तहत घर घर जाकर पड़ताल करने, दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई करने, और वोटर लिस्ट के फाइनल प्रकाशन के लिए अलग अलग समय सारिणी तय की गई है। आयोग वोटरों को अपने रिकॉर्ड चेक करने और तय प्रक्रिया के हिसाब से दावा या आपत्ति दर्ज कराने की सुविधा भी दे रहा है।
कांग्रेस के दावे के मुताबिक आंकड़ों पर एक नजर डालें तो पहले और दूसरे चरण में 7.8 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए, तीसरे चरण में 6.18 करोड़ वोटरों के नाम हटाए गए, और 5.43 करोड़ वोटरों को अतिरिक्त कागजात के लिए नोटिस दिए गए। पार्टी का कहना है कि SIR से पहले की लिस्ट की तुलना में 13 फीसदी वोटरों के नाम हटाए गए, तीसरे चरण में यह आंकड़ा 17 फीसदी से ज्यादा रहा, और करीब 15 फीसदी और वोटरों के नाम हटने का खतरा बना हुआ है। कांग्रेस का दावा है कि कुल मिलाकर 32 फीसदी वोटर इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं।
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