ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर कांग्रेस का 28 सितंबर को राज्यभर आंदोलन
SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, महाराष्ट्र में जिला स्तर पर आंदोलन का ऐलान।
देश में निर्वाचन आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसी मुद्दे पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस ने सोमवार, 28 सितंबर को राज्यभर आंदोलन करने का ऐलान किया है। पार्टी की मांग है कि ज्ञानेश कुमार को सेवा से बर्खास्त कर उनकी गिरफ्तारी की जाए।
कांग्रेस के बयान के मुताबिक, महाराष्ट्र के सभी जिलों में तीखा आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में पार्टी के नेता, पदाधिकारी, विधायक, सांसद और कार्यकर्ता शामिल होंगे।
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की SIR मुहिम पर भी सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ऐसे तरीके से काम कर रहे हैं जिससे सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा हो। कांग्रेस ने कहा है कि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाया जाना लोकतंत्र के लिए एक गंभीर मामला है। पार्टी ने देशभर में मतदाताओं के नामों में हुए बदलावों को लेकर अलग-अलग आंकड़ों का हवाला देते हुए इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच की मांग की है। हालांकि, बयान में जो दावा किया गया है कि देशभर में 13 करोड़ और महाराष्ट्र में 3 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए, उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी पहले भी वोट चोरी का आरोप लगा चुके हैं, और कांग्रेस ने अब उसी आरोप का हवाला देते हुए निर्वाचन आयोग के कामकाज के तरीके पर निशाना साधा है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।
इस बीच यह भी सामने आया है कि निर्वाचन आयोग के दो आयुक्तों ने मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई है। हालांकि आयोग ने इस पर सफाई दी है कि आंतरिक चर्चा और अलग-अलग राय रखना संस्थागत प्रक्रिया का ही हिस्सा है।
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग करते हुए आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी ने कहा है कि 28 सितंबर को जिलावार आंदोलन के जरिए निर्वाचन आयोग के कामकाज के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
अब इस आंदोलन को राज्यभर से कैसा जवाब मिलता है और निर्वाचन आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर टिकी है।
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