मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
16:39 IST

मेडिकल कॉलेजों में फिजियोलॉजी के 34 पद घटाने का फैसला, कोर्ट ने फिलहाल रोका

मेडिकल कॉलेजों में फिजियोलॉजी के 34 पद घटाने का फैसला, कोर्ट ने फिलहाल रोका
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फिजियोलॉजी विभाग के प्राध्यापक पदों में कटौती का फैसला हुआ है। इसका महाराष्ट्र राज्य वैद्यकीय अध्यापक संगठन ने विरोध किया है। फिलहाल इस मामले में कोर्ट ने स्थगनादेश दे रखा है।

वैद्यकीय शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के न्यूनतम मानकों को आधार बनाकर पुराने आकृतिबंध के 227 पदों को घटाकर 193 करने का निर्णय लिया है। यानी विभाग में 34 पद कम होंगे और कुल मनुष्यबल में करीब 15 फीसदी की कमी आएगी।

पुराने आकृतिबंध में फिजियोलॉजी विभाग के लिए 39 प्राध्यापक, 72 सहयोगी प्राध्यापक और 116 सहायक प्राध्यापक, यानी कुल 227 पद मंजूर थे। प्रस्तावित नए आकृतिबंध में 38 प्राध्यापक, 58 सहयोगी प्राध्यापक और 97 सहायक प्राध्यापक रहेंगे।

इस हिसाब से प्राध्यापकों के 1, सहयोगी प्राध्यापकों के 14 और सहायक प्राध्यापकों के 19 पद कम किए जा रहे हैं। आंकड़ों में देखें तो 227 में से 34 पद घटने का मतलब है कि विभाग के हर 7 स्वीकृत पदों में लगभग 1 पद कम हो जाएगा।

सबसे ज्यादा असर सहायक प्राध्यापक के स्तर पर दिखता है। उनके 116 पद घटकर 97 रह जाएंगे, यानी 19 पद या करीब 16.4 फीसदी की कमी। सहयोगी प्राध्यापक के 72 पदों में से 14 पद कम होंगे, जो करीब 19.4 फीसदी की कटौती है। प्राध्यापक के 39 पदों में से एक पद कम किया जा रहा है।

संगठन का कहना है कि पुराने और बड़े सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की जिम्मेदारी सिर्फ एमबीबीएस विद्यार्थियों को पढ़ाने तक सीमित नहीं है। पीजी, नर्सिंग, पैरामेडिकल और दूसरे स्वास्थ्य पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ शोध, प्रशासनिक काम और अस्पताल से जुड़े शैक्षणिक दायित्व भी शिक्षकों को निभाने पड़ते हैं।

कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में ओपीडी, आपातकालीन सेवाएं, जांच और बेड ऑक्यूपेंसी कई बार एनएमसी के न्यूनतम मानकों से ज्यादा होती है। संगठन के मुताबिक सिर्फ न्यूनतम मानकों पर पद तय करने के बजाय हर कॉलेज का असल वर्कलोड, विद्यार्थियों की संख्या, बेड क्षमता, मरीजों का दबाव, विभागीय सेवाएं और शोध कार्य भी पद तय करने का आधार होना चाहिए।

महाराष्ट्र राज्य वैद्यकीय अध्यापक संगठन के अध्यक्ष डॉ. समीर गोलावार ने कहा, "सरकार को हर मेडिकल कॉलेज का कॉलेजवार असल वर्कलोड, विद्यार्थियों की संख्या और अस्पताल की सेवाओं का अध्ययन करना चाहिए। प्राध्यापक पढ़ाने के साथ मरीजों के इलाज, क्लिनिकल प्रशिक्षण, शोध और प्रशासनिक काम से भी जुड़े हैं। इसलिए पद कम करने से पहले असल जरूरत का आकलन जरूरी है।"

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे