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15:46 IST

पंचनामे और पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही सूखा पीड़ित किसानों को मदद: बावनकुले

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि फसल नुकसान के पंचनामे और पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही सूखे की मदद पर फैसला होगा।

पंचनामे और पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही सूखा पीड़ित किसानों को मदद: बावनकुले
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

राज्य में सूखे के हालात को देखते हुए किसान चाहते हैं कि उन्हें फौरन आर्थिक मदद मिले। इसी बीच राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने मदद को लेकर सरकार का रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि फसलों के पंचनामे और पूरी रिपोर्ट हाथ में आने के बाद ही मदद का फैसला लिया जाएगा।

बावनकुले के मुताबिक अगर आज के आज ही मदद का ऐलान कर दिया गया, तो कुछ किसानों का नुकसान हो सकता है। इसीलिए हालात की पूरी और बारीकी से समीक्षा करना जरूरी है, यह बात उन्होंने साफ कही।

सूखे को लेकर मंत्रिमंडल की उपसमिति की बैठक मंगलवार, 29 सितंबर को होनी है। इस उपसमिति के अध्यक्ष राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले हैं। बैठक में सूखा प्रभावित इलाकों के हालात, फसल का नुकसान, पीने का पानी, जानवरों के लिए चारा और किसानों को दी जाने वाली मदद की समीक्षा होगी। राज्य सरकार ने 265 तालुकों में सूखा घोषित किया है, और इसके बाद हो रही यह बैठक अहम मानी जा रही है। उपसमिति में गिरीश महाजन, गुलाबराव पाटील, पंकजा मुंडे, दत्तात्रय भरणे, जयकुमार गोरे, संजय राठोड और प्रताप सरनाईक जैसे सदस्य हैं।

राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने किसानों को भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि यह कुदरत की आफत है, लेकिन इस कसौटी के वक्त किसान हिम्मत न हारें। राज्य सरकार मजबूती से उनके साथ खड़ी है। भरणे ने वादा किया कि केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना जल्द से जल्द किसानों की मदद की जाएगी। राज्य के कई जिलों में बारिश ने दगा दिया है, खड़ी फसलें जल गई हैं और किसान परेशान हैं।

इस बीच कांग्रेस ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि 265 तालुकों में भीषण सूखा घोषित है और किसान पानी के लिए गुहार लगा रहे हैं। एक तरफ किसानों के हिस्से में सूखा है और दूसरी तरफ डेटा सेंटरों को भरपूर पानी और बिजली मिल रही है, यह कैसा विकास है, ऐसा सवाल कांग्रेस ने सरकार से पूछा है। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करके यह बात कही और सरकार के विकास मॉडल पर सवाल खड़े किए। उसका कहना है कि सूखे में किसानों की खेती के लिए पानी कम पड़ रहा है, जबकि डेटा सेंटरों के लिए पानी और बिजली भरपूर दी जा रही है।

शरद पवार ने मुख्यमंत्री को जो चिट्ठी लिखी है, उसके बारे में पूछे जाने पर बावनकुले ने सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के तौर पर पत्र देना उनका काम है, लेकिन सिर्फ पवार ने पत्र दिया है इसलिए हम मदद कर रहे हैं, ऐसा नहीं है। उनके मुताबिक अलग-अलग पार्टियों के नेताओं और विधायकों के दो हजार से ज्यादा पत्र सरकार के पास आ चुके हैं। मुख्यमंत्री खुद किसानों के खेतों पर जाकर हालात देख रहे हैं। जो तालुके सूखे की सूची से छूट गए हैं, उनका भी अध्ययन करके न्याय दिया जाएगा, यह भरोसा बावनकुले ने दिया।

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