सूखे में किसानों को राहत: कर्ज वसूली पर रोक, बैंकों को 30 अप्रैल 2027 तक की मोहलत
राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त किसानों के लिए कर्ज वसूली पर रोक लगाई और फसल कर्ज के पुनर्गठन का आदेश दिया।
महाराष्ट्र में इस साल बारिश कम हुई, जिससे राज्य में गंभीर सूखे जैसे हालात बन गए हैं। कई इलाकों में फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है और किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त किसानों को राहत देने के लिए खेती के कर्ज की वसूली पर रोक लगाने का सरकारी आदेश जारी किया है। साथ ही फसल कर्ज का पुनर्गठन करने के आदेश भी दिए गए हैं।
सरकार के फैसले के मुताबिक बैंकों को फसल कर्ज के पुनर्गठन की प्रक्रिया 30 अप्रैल 2027 तक पूरी करनी होगी। सूखे की मार झेल चुके किसानों को अगले खरीफ सीजन में पैसों की दिक्कत न हो, इसके लिए बैंकों को उन्हें फसल कर्ज देने की सूचना भी दी गई है।
बारिश की कमी को देखते हुए राज्य के 305 तालुकाओं में सूखे के 'ट्रिगर-1' के तहत उपाय लागू करने का ऐलान किया गया है। इससे पहले 265 तालुके इसमें शामिल किए गए थे। बाद में और तालुके जोड़कर सूखा राहत के उपायों का दायरा बढ़ाया गया है।
सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों पर कर्ज वसूली के लिए दबाव न डाला जाए, इस पर भी सरकार ने अपना रुख साफ किया है। राजस्व मंत्री और सूखा निवारण उपसमिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने निर्देश दिए हैं कि सूखे के दौरान कर्ज वसूली के लिए बैंक या सहकारी साख संस्था का कोई कर्मचारी किसान के दरवाजे पर न जाए। इस बारे में जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारियों को भी जरूरी सूचना देने को कहा गया है।
किसान परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर सूखे की आर्थिक मार न पड़े, इसलिए सरकार ने दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का फैसला किया है। इसका मकसद सूखाग्रस्त परिवारों पर पड़ा आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम करना है।
रोजगार के मोर्चे पर रोजगार गारंटी योजना विभाग ने 6 हजार 728 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराया है, ताकि सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों और खेत मजदूरों को गांव में ही काम मिल सके। इस रकम से सिंचाई से जुड़े काम, गौशालाएं, निजी फलों के बाग लगाना, बोरवेल रिचार्ज, बांस लगाना, प्रधानमंत्री आवास योजना के काम, रेशम उद्योग के लिए शेड, कंपोस्ट गड्ढे और सार्वजनिक तालाबों की मरम्मत जैसे कई काम हाथ में लिए जाएंगे।
कर्ज वसूली पर रोक, फसल कर्ज का पुनर्गठन, नए खरीफ कर्ज की उपलब्धता और रोजगार गारंटी के जरिए सरकार सूखाग्रस्त इलाकों के किसानों और खेत मजदूरों को आर्थिक सहारा देने की कोशिश कर रही है।
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