महाराष्ट्र में 265 तालुकों में सूखा घोषित, इस हफ्ते के बाद बारिश में लंबा ब्रेक संभव
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 26 सितंबर से 10 दिन बारिश की विश्रांति के बाद अक्टूबर के पहले हफ्ते में मानसून की वापसी हो सकती है, तब तक रबी फसल के लिए पानी बचाना अहम
महाराष्ट्र के किसानों के लिए इस बार का मानसून सीजन बड़ी उठापटक भरा रहा है। सीजन की शुरुआत में कुछ इलाकों में झमाझम बारिश हुई, लेकिन उसके बाद बारिश ने जो लंबा ब्रेक लिया उससे कई जगह खेती को नुकसान पहुंचा। अब राज्य के पूरे 358 तालुकों में से 265 तालुकों में ट्रिगर 1 के तहत सूखा घोषित कर दिया गया है, यानी राज्य के करीब 75 फीसदी हिस्से में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। फसल तैयार होने के वक्त बारिश गायब हो जाने से किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है, और कई इलाकों में लोग अब भी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। इस पूरे मामले को देखते हुए राज्य सरकार ने सूखाग्रस्त इलाकों के लिए 12 तुरंत उपायों को मंजूरी दे दी है, और प्रशासन ने पंचनामे का काम भी तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भरोसा दिलाया है कि सूखाग्रस्त घोषित इन 265 तालुकों में सरकार सबको मदद पहुंचाएगी। जिन तालुकों का नाम अभी की अस्थायी लिस्ट में नहीं आया, वहां भी दोबारा जांच होगी और ट्रिगर 3 के तहत जरूरी इलाकों को शामिल कर प्रभावित किसानों तक मदद पहुंचाई जाएगी। फडणवीस ने कहा कि जिस भी किसान का असल में नुकसान हुआ है, उसे सरकारी मदद से वंचित नहीं रखा जाएगा। आने वाले मौसम को लेकर मुख्यमंत्री ने अल नीनो का जिक्र भी किया, जो प्रशांत महासागर के पानी का तापमान बढ़ने से बनता है। जानकारों के अनुमान के मुताबिक अल नीनो का असर फरवरी में सबसे ज्यादा यानी पीक पर पहुंच सकता है, उसके बाद समुद्र का तापमान कम होने लगेगा और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होगी। तब तक प्रशासन और लोगों को इससे निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
सूखे के हालात को देखते हुए पानी के मैनेजमेंट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। हर जिले के लिए अलग प्लान बनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मौजूद पानी का स्टॉक अगले जुलाई-अगस्त तक चल सके। उसके बाद बचे हुए पानी का दोबारा इस्तेमाल रबी सीजन और फैक्ट्रियों के लिए स्थानीय स्तर पर प्लान करके किया जाएगा, ताकि पानी बेकार न जाए और जो स्टॉक है उसका किफायत से इस्तेमाल हो।
प्रादेशिक मौसम केंद्र, कुलाबा के अनुमान के मुताबिक सोमवार 8 सितंबर को राज्य के 7 जिलों - पुणे घाटमाथा, सातारा घाटमाथा, कोल्हापुर घाटमाथा, कोल्हापुर जिला, बीड और धाराशिव - में तेज हवा और बिजली की गड़गड़ाहट के साथ तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मंगलवार को भी नासिक घाटमाथा, रायगड, रत्नागिरी, पुणे, सातारा, सांगली, कोल्हापुर और सोलापुर - इन 8 जिलों में तेज बारिश की चेतावनी है। इसीलिए किसानों और आम लोगों को मौसम विभाग के अलर्ट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।
प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के तापमान का सीधा असर मानसून पर पड़ता है। मिली जानकारी के मुताबिक प्रशांत महासागर के विषुववृत्तीय इलाके में पेरू के पास पानी का तापमान 18 डिग्री सेल्सियस, इक्वाडोर के पास 24 डिग्री, कोलंबिया के पास 26 डिग्री और काली के पास 28 डिग्री सेल्सियस है। हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से में पानी का तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस है, और इसमें ज्यादा बढ़ोतरी न होने से इंडियन ओशन डायपोल यानी IOD फिलहाल सामान्य स्थिति में बताया जा रहा है। इसी वजह से अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस हफ्ते के बाद महाराष्ट्र में बारिश कम होकर लंबी उघाड़ रह सकती है। मानसून फिलहाल राजस्थान के करीब आधे हिस्से में है और जल्द ही तेजी से पीछे हटने की संभावना है। महाराष्ट्र से मानसून की वापसी के दौरान हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञ पंजाबराव डख ने भी राज्य में आगे की बारिश को लेकर अपना अंदाजा बताया है। उनके मुताबिक 26 सितंबर से अगले 10 दिन बारिश की विश्रांति रह सकती है, उसके बाद राज्य में फिर बारिश आ सकती है और अक्टूबर के पहले हफ्ते में मानसून की वापसी का अंदाजा उन्होंने जताया है। लेकिन इस दौरान पूरे महाराष्ट्र में एक जैसे हालात नहीं रहेंगे। विदर्भ में फिलहाल तेज बारिश हो रही है और पूर्व विदर्भ में इसका जोर ज्यादा रहने की संभावना है। गडचिरोली, वर्धा, नागपुर, भंडारा, गोंदिया, चंद्रपुर और यवतमाळ जिलों में अगले 2 दिन तेज बारिश की संभावना उन्होंने जताई है। इसके उलट पश्चिम महाराष्ट्र, दक्षिण महाराष्ट्र और उत्तर महाराष्ट्र में कहीं-कहीं ही बारिश हो सकती है, बाकी ज्यादातर इलाकों में मौसम सूखा रहने का अंदाजा है।
इस बार बारिश में आए इस ब्रेक से खरीफ सीजन पर असर पड़ने के बाद अब रबी सीजन के सामने भी पानी की चुनौती खड़ी हो सकती है। इसीलिए मौजूद पानी के स्टॉक का सही प्लानिंग आने वाले वक्त में अहम मुद्दा रहेगा। अगर बारिश की लंबी उघाड़ रही, तो रबी फसलों के लिए मौजूद पानी पर दबाव आ सकता है। इसलिए हर जिले का पानी का स्टॉक, फसलों की स्थिति और स्थानीय बारिश का अंदाजा देखकर प्लानिंग करना जरूरी होगा। सरकार ने भी मौजूद पानी को जुलाई-अगस्त तक बचाकर रखने और बाकी पानी का रबी सीजन के लिए दोबारा इस्तेमाल करने की प्लानिंग करने के निर्देश दिए हैं।
आने वाले कुछ दिनों में कुछ जिलों को तेज बारिश से राहत मिल सकती है, लेकिन उसके बाद राज्य के कई हिस्सों में लंबी उघाड़ रहने की संभावना है। पंजाबराव डख ने 26 सितंबर से 10 दिन की विश्रांति के बाद अक्टूबर के पहले हफ्ते में बारिश लौटने का अंदाजा दिया है। ऐसे में फिलहाल किसानों के लिए बारिश की एक-एक बूंद कीमती है, और आगे पानी की सख्त प्लानिंग तथा सरकारी मदद का सही क्रियान्वयन, ये दोनों ही चीजें निर्णायक साबित होंगी।
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