मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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15:46 IST

वडेट्टीवार ने कहा, किसानों को हेक्टेयर पर 1 लाख रुपए दो, GR में देरी क्यों

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने नागपुर में महाराष्ट्र सरकार की राहत नीति पर सवाल उठाए और किसानों को तुरंत मदद देने की मांग की।

वडेट्टीवार ने कहा, किसानों को हेक्टेयर पर 1 लाख रुपए दो, GR में देरी क्यों
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर से कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने एक बार फिर राज्य सरकार को किसानों के मुद्दे पर घेरा है। उनका कहना है कि सरकार 5 अक्टूबर की तारीख का इंतजार क्यों कर रही है, जबकि किसानों को अभी, तुरंत मदद चाहिए। वडेट्टीवार ने सरकार की तरफ से जारी राहत वाले GR पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

वडेट्टीवार के मुताबिक सिर्फ कागज पर घोषणा कर देने से किसानों की तकलीफ कम नहीं होगी। उन्होंने कहा कि किसानों को पर्याप्त आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, और वो भी बिना देरी के। उनकी मांग है कि सरकार हेक्टेयर पर 1 लाख रुपये की सहायता दे, ताकि किसान अपने नुकसान की भरपाई कर सकें।

वडेट्टीवार ने सरकार की राहत व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे 'थातूरमातूर' यानी लीपापोती वाली व्यवस्था बताया। उनका कहना है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या घोषणा से काम नहीं चलेगा, बल्कि नुकसान झेल रहे किसानों के बैंक खातों तक सीधे पैसा पहुंचना चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि किसानों को उनके नुकसान के अनुपात में सीधी आर्थिक मदद मिलनी चाहिए, ना कि किसी औपचारिकता के जरिए।

यह पहली बार नहीं है जब वडेट्टीवार ने यह मुद्दा उठाया हो। इससे पहले भी वो किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर आर्थिक मदद, कर्जमाफी और रोजगार गारंटी योजना के तहत काम शुरू करवाने की मांग कर चुके हैं। 23 सितंबर 2026 को उन्होंने मांग की थी कि किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता दी जाए। इसके अलावा उन्होंने पीक कर्ज और बाकी कर्ज माफ करने की भी मांग रखी थी, साथ ही खेतिहर मजदूरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार गारंटी के काम शुरू करने को भी कहा था।

वडेट्टीवार ने सरकार से अपील की है कि किसानों की मौजूदा हालत को देखते हुए राहत की प्रोसेस तेज की जाए। उनके मुताबिक प्राकृतिक आपदा और फसल के नुकसान की मार झेल रहे किसानों को आर्थिक संकट से निकालने के लिए सीधी मदद ही एकमात्र रास्ता है।

किसानों को मुआवजा देने के मामले में अलग-अलग राजनीतिक दल अपनी-अपनी मांगें उठाते रहे हैं। इस बीच सरकार की तरफ से भी तय मानकों और सहायता राशि के हिसाब से प्रभावित किसानों तक राहत पहुंचाने का काम जारी बताया जा रहा है।

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