एसआयआर विवाद पर रामदास आठवले बोले, चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था, सरकार का कोई हाथ नहीं
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और एसआयआर के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि एसआयआर चुनाव आयोग से जुड़ा विषय है और इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। राहुल गांधी की इस्तीफे की मांग को आठवले ने राजनीतिक मुद्दा बताया और कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस पूरे मामले पर खुद अपनी बात रखनी चाहिए।
एसआयआर पर बोलते हुए आठवले ने कहा कि इसका मकसद मतदाता सूची को पारदर्शी बनाना है। उनके मुताबिक जिन लोगों को वोट देने का हक है, उनका नाम सूची में बना रहना जरूरी है, जबकि फर्जी कागजों के आधार पर जो नाम सूची में जोड़े गए हैं या जिन मतदाताओं की मौत हो चुकी है, उनके नाम हटाए जाने चाहिए। साथ ही अगर एक ही पते पर असामान्य तरीके से बड़ी तादाद में लोगों के नाम दर्ज हैं तो इसकी भी जांच होनी चाहिए, ऐसा आठवले ने कहा।
चुनाव आयोग की समिति में हुए विवाद पर आठवले ने कहा कि एसआयआर का फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिया था। बाद में दोनों चुनाव आयुक्तों की नाराजगी की खबर सामने आई थी, लेकिन आखिर में तीनों ने साथ मिलकर ही एसआयआर की घोषणा की थी, यह बात उन्होंने साफ की।
आठवले ने आगे कहा कि ज्ञानेश कुमार ने एसआयआर को लेकर अपना पक्ष रख दिया है और सरकार का इस पूरी प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है। संविधान के मुताबिक चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और सरकार व चुनाव आयोग के बीच इस तरह का कोई सीधा दखल नहीं होता, यह उन्होंने दोहराया।
राहुल गांधी की इस्तीफे की मांग पर ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। कॉक्रोज जनता पार्टी (सीजेपी) की तरफ से ज्ञानेश कुमार का अगले 48 घंटों में इस्तीफा लिए जाने की चेतावनी दी गई है। इस पर आठवले ने कहा कि सीजेपी ने इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर आंदोलन किया था, और उस वक्त उन्हें पूरे देश से समर्थन मिला था।
सीजेपी के इस आंदोलन के बाद उस वक्त के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी और सीजेपी की वह मांग पूरी हो गई थी। आठवले ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीजेपी सिर्फ इस्तीफे की मांग करने के लिए ही बनाई गई लगती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर हर बार किसी न किसी का इस्तीफा ही मांगना है, तो संस्था का नाम बदलकर "राजीनामा जनता पार्टी" रख देना चाहिए।
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