महाराष्ट्र में सूखे पर शरद पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस को खत लिखकर विशेष सत्र बुलाने की मांग की
राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर सूखे को लेकर 17 मांगें रखीं और विधानमंडल का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।
महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर हालत को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरदचंद्र पवार) पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने राज्य सरकार को सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम पत्र लिखकर 17 अहम मांगें रखी हैं।
पवार ने अपने पत्र में सरकार से कहा है कि सूखे की मार झेल रहे किसानों, खेतमजदूरों और गांव के आम लोगों को तुरंत राहत देने के लिए फौरन कदम उठाए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि सूखे के इस गंभीर मुद्दे पर तफसील से चर्चा करने के लिए विधानमंडल का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया जाए।
इस बीच राज्य सरकार ने भले ही राज्य में सूखा घोषित कर दिया हो, लेकिन विपक्षी पार्टियां सरकार के इस रुख से नाराज हैं। विपक्ष का कहना है कि जो सुविधाएं किसानों को पहले से मिल रही थीं, उन्हीं का जिक्र सरकार की अधिसूचना में किया गया है, इसलिए कई पार्टियों ने सरकार से इस बारे में साफ खुलासा करने की मांग की है।
दूसरी तरफ राज्य सरकार के अलग-अलग विभाग भी इस मामले में काम में जुट गए हैं। मुख्यमंत्री की हिदायत के बाद अब सीधे खेत की मेड़ पर जाकर पंचनामे किए जाएंगे। जिलाधिकारी से लेकर तलाठी तक सभी अफसरों को राज्य सरकार ने किसानों के अलग-अलग सवालों पर काम करने का आदेश दिया है।
शरद पवार ने ट्विटर पर भी लिखा कि महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों, खेतमजदूरों और ग्रामीण नागरिकों को तुरंत राहत मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र के जरिए 17 मांगें की जा रही हैं।
पवार की पत्र में दी गई 17 मांगों में से प्रमुख मांगें इस तरह हैं। बचे हुए जिन तालुकों में सूखे के मानक पूरे होते हैं मगर अब तक सूखाग्रस्त घोषित नहीं किए गए, उन्हें फौरन सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। सूखा प्रभावित इलाकों की पूरी जमीन महसूल माफ की जाए। खेती के कर्ज के साथ सहकारी और राष्ट्रीयकृत बैंकों का कर्ज, अल्पसंख्यक और आदिवासी विभाग का निजी कर्ज, बागवानी कर्ज और महिला बचत गटों का पूरा कर्ज माफ किया जाए। कृषि पंपों के थके हुए बिल समेत सारे बिजली बिल माफ हों।
सूखाग्रस्त इलाकों में स्कूल-कॉलेज के छात्रों की फीस, हॉस्टल फीस और मेस फीस पूरी तरह माफ की जाए। रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के नियमों में ढील देकर जो भी काम मांगे उसे 3 किलोमीटर के दायरे में तुरंत काम दिया जाए। पीने के पानी के टैंकर मंजूर करने का अधिकार जिलाधिकारी की जगह तहसीलदार को तुरंत दिया जाए। किसानों के कृषि पंपों की बिजली बिल्कुल बंद न की जाए और लोडशेडिंग तुरंत रोकी जाए।
हर किसान और खेतमजदूर परिवार को हर महीने 25 किलो अनाज मुफ्त बांटा जाए। मुश्किल में फंसे किसानों के मवेशियों के चारे के लिए सीधे उनके बैंक खाते में अनुदान डाला जाए। जलसंधारण के अटके काम पूरे करने के लिए राज्य से खास फंड मंजूर हो। नुकसान झेल रहे किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये और खेतमजदूर परिवार को 25,000 रुपये सीधी मदद दी जाए।
बागवानी, केले, गन्ना और धान उगाने वाले किसानों को फौरन आर्थिक मदद दी जाए। सूख रही बागों को बचाने के लिए टैंकर से पानी देने का तुरंत आदेश निकाला जाए। सरकार की निजी लाभ वाली जो योजनाएं अटकी पड़ी हैं, उनका अनुदान तुरंत किसानों के खाते में डाला जाए। और सूखा राहत का पूरा फंड सीधे विभागीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को सौंपा जाए, यह भी पवार ने मांग की है।
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