ठाणे में शिवसेना (यूबीटी) के विभागप्रमुख प्रदीप पूर्णेकर की गोली मारकर हत्या, दो संदिग्ध हिरासत में
मानपाडा में दफ्तर के बाहर हुए हमले में पूर्णेकर की मौत हुई। परिवार ने साजिश के आरोप लगाए हैं और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी तक शव लेने से इनकार किया है।
ठाणे के मानपाडा इलाके में ठाकरे गुट की शिवसेना के विभागप्रमुख प्रदीप पूर्णेकर की सोमवार (२९ सितंबर) को गोली मारकर और तेज धार वाले हथियार से वार करके हत्या कर दी गई। यह हमला मानपाडा में उनके दफ्तर के बाहर हुआ।
हमले के बाद पूर्णेकर को कापूरबावडी इलाके के इन्फिनिटी अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया। लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस ने इस मामले में पप्या शिंदे और आकाश निमसे नाम के दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
पूर्णेकर के परिवार का आरोप है कि यह हत्या किसी पुराने विवाद की वजह से हुई है। परिवार ने ठाणे की पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे पर हत्या की साजिश रचने का शक जताया है। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है। जांच से ही साफ होगा कि असली वजह क्या थी और इस हत्या के पीछे कौन है।
वारदात के बाद इलाके का सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ लगा है। उसमें दो लोग चेहरे पर रुमाल बांधे हुए बाइक पर पूर्णेकर के दफ्तर की तरफ जाते दिख रहे हैं। पुलिस इसी फुटेज के आधार पर आगे की जांच कर रही है।
प्रदीप पूर्णेकर के बेटे राम पूर्णेकर ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ दिन पहले नीलकंठ इलाके में उन्होंने राजेंद्र शिंदे को उन लोगों के साथ खड़े देखा था, जिन्हें अब संदिग्ध के तौर पर हिरासत में लिया गया है। राम के मुताबिक वे वहां से गुजर रहे थे तो ये लोग उन्हें देखकर चौंक गए। फिर एक आदमी ने उनके पास आकर पूछा, "तू प्रदीप पूर्णेकर का बेटा है क्या?"
राम का दावा है कि इसके बाद उन्हें शक हुआ कि कुछ साजिश चल रही है और उन्होंने यह बात अपने पिता को पहले ही बता दी थी। उनके कहने के मुताबिक प्रदीप पूर्णेकर ने भी उन्हें सलाह दी थी कि रात दस बजे के बाद घर से बाहर मत निकलना।
राम पूर्णेकर ने बताया कि मीनाक्षी शिंदे की एक कथित ऑडियो क्लिप पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। उनका दावा है कि उस क्लिप में उनके पिता का नाम लेकर धमकी दी गई थी। इसी वजह से उन्हें मीनाक्षी शिंदे पर शक है।
राम ने यह भी कहा कि पप्या शिंदे उनके पिता का पुराना दोस्त था। उनका दावा है कि घटना से दो दिन पहले वह पूर्णेकर के दफ्तर आया था और उनके साथ काफी देर तक बात करता रहा। हमले के वक्त दफ्तर में ज्यादा लोग नहीं थे, ऐसा भी राम ने बताया।
राम के मुताबिक पप्या शिंदे यह कह रहा था कि उसे खुद गोली लगी और उसने हमलावरों को पकड़ा। लेकिन राम का दावा है कि उसे कोई चोट नहीं आई थी, और इसी आधार पर उन्होंने उसकी भूमिका पर सवाल उठाया है। राम ने बताया कि पप्या शिंदे अस्पताल भी आया था और वहां किसी को गाली दे रहा था। इसके बाद पुलिस ने उसे ही संदिग्ध के तौर पर हिरासत में ले लिया।
प्रदीप पूर्णेकर का शव पोस्टमॉर्टम के लिए जे. जे. अस्पताल में रखा गया है। परिवार ने साफ कर दिया है कि जब तक सभी आरोपी गिरफ्तार नहीं होते, वे शव अपने कब्जे में नहीं लेंगे। राम पूर्णेकर ने कहा कि परिवार कापूरबावडी पुलिस स्टेशन में बैठा रहेगा और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही आगे की प्रक्रिया पर फैसला होगा।
राम ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मांग की है कि उनके पिता को न्याय मिले। उन्होंने कहा, "मेरे पिता ने जिंदगी भर न्याय के लिए काम किया, इसलिए उन्हें न्याय मिलना चाहिए।" राम ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे से अभी तक उनका संपर्क नहीं हो पाया है। इस बीच पुलिस सीसीटीवी फुटेज, चश्मदीदों की जानकारी और दूसरे सबूतों के आधार पर हमले की वजहों का पता लगा रही है।
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