ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, महाराष्ट्र में SIR रोकने की मांग
कोल्हापुर बेंच में दाखिल याचिका में चुनाव आयोग के फैसलों और ECINet प्रोसेस पर सवाल, SIR के दौरान कटे नाम वापस जोड़ने की मांग
देश में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सियासी और कानूनी बहस के बीच अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अगुवाई में लिए गए कुछ फैसलों और प्रशासनिक प्रोसेस को बॉम्बे हाईकोर्ट के कोल्हापुर खंडपीठ में चुनौती दी गई है। यह याचिका प्रथमेश गोपाळ गवाणकर, गौरव सूर्यकांत नाखरेकर, आदेश शशिकांत भाटकर और स्मिताली निलेश नार्वेकर ने दाखिल की है, ऐसा बताया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट असीम सरोदे समेत वकीलों की टीम पैरवी कर रही है।
याचिका में चुनाव आयोग की फैसला लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। खासकर यह मुद्दा उठाया गया है कि आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने अलग-अलग फैसलों और प्रोसेस पर 14 बार आपत्ति दर्ज करवाई। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। ये आपत्तियां वोटरों के नाम जोड़ने, हटाने और वापस शामिल करने, Form-6 और वोटर लिस्ट के डेटाबेस से जुड़ी बताई जा रही हैं।
याचिका में वोटर रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस, वोटरों के नाम हटाने, वोटर लिस्ट के डेटाबेस, Electoral Registration Officers यानी ERO की भूमिका और ECINet सिस्टम की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन सभी प्रोसेस में नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। हालांकि यह फिलहाल याचिका में किए गए दावे भर हैं, इन पर अभी कोर्ट का कोई फैसला नहीं आया है।
'Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners (Appointment, Conditions of Service and Term of Office) Act, 2023' की धारा 18 के मुताबिक आयोग का कामकाज जितना हो सके सर्वसम्मति से चलाने का प्रावधान है। लेकिन अगर आयुक्तों के बीच मतभेद हो, तो बहुमत की राय से फैसला लेने का प्रावधान भी उसी धारा में मौजूद है। इसलिए याचिका में उठाया गया मुख्य कानूनी सवाल यही है कि जो फैसले और प्रशासनिक प्रोसेस अपनाई गई, वे इस कानूनी दायरे में हुई या नहीं।
याचिका में महाराष्ट्र में चल रही Special Intensive Revision यानी SIR प्रोसेस रोकने की मांग की गई है। साथ ही SIR के दौरान कथित तौर पर गलत तरीके से वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को फिर से शामिल करने की मांग भी रखी गई है। इसके अलावा वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों और प्रोसेस की जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में अलग जुडिशियल कमेटी बनाने की मांग भी याचिकाकर्ताओं ने की है।
इस बीच SIR और चुनाव आयोग की अंदरूनी फैसला लेने की प्रोसेस को लेकर देश में सियासी विवाद भी जारी है। आयोग ने कहा है कि दो आयुक्तों की तरफ से जताई गई मतभिन्नता संस्थागत चर्चा का हिस्सा है, और SIR समेत अहम फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से ही लिए हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि कोल्हापुर खंडपीठ इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है और याचिका में की गई मांगों पर क्या निर्देश देता है।
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