नाना पटोले का दावा, महाराष्ट्र में 99 फीसदी इलाके में सूखे जैसे हालात
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने महाराष्ट्र सरकार पर सूखा घोषित करने में देरी का आरोप लगाया और सरसकट कर्जमाफी की मांग की, साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने राज्य सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि बारिश की कमी की वजह से राज्य के कई हिस्सों में खेती को भारी नुकसान हुआ है। पटोले के मुताबिक सरकार ने सूखा घोषित करने में देरी की, और उन्होंने दावा किया कि सिर्फ 75 फीसदी नहीं बल्कि राज्य के करीब 99 फीसदी इलाके में सूखे जैसे हालात हैं।
पटोले ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने महाराष्ट्र से पहले ही सूखा घोषित करके मदद शुरू कर दी थी, जबकि महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में फैसला लेने में देर लगाई। उनका आरोप है कि इसी देरी की वजह से किसानों की हालत और गंभीर हो गई है।
उन्होंने कहा कि सूखे जैसी हालत में किसानों को सिर्फ भरोसा दिलाने से काम नहीं चलेगा, उन्हें तुरंत असली मदद चाहिए। इसके लिए पटोले ने मांग की कि फौरन पंचनामे किए जाएं, सरसकट कर्जमाफी का ऐलान हो और किसानों को अच्छी खासी आर्थिक मदद दी जाए।
इसी बीच नाना पटोले ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के उस बयान का हवाला दिया जिसमें भट्टाचार्य ने ज्ञानेश कुमार को पद्मभूषण या पद्मविभूषण पुरस्कार दिए जाने की मांग की थी। इसी संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए पटोले ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
पटोले ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग के दो साथी सदस्यों ने अलग अलग मुद्दों पर केंद्रीय सचिव और मुख्य चुनाव आयुक्त को चिट्ठियां लिखी हैं। उनके मुताबिक इन चिट्ठियों में चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी होने की बात की ओर ध्यान दिलाया गया है।
नाना पटोले ने साफ किया कि उनकी आपत्ति भाजपा पर नहीं बल्कि मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भाजपा की तरफ से ज्ञानेश कुमार के समर्थन में इतनी जोरदार भूमिका ली जा रही है, तो अलग अलग राज्यों में हुए चुनाव नतीजों पर भी सवाल खड़े होते हैं।
पटोले ने पूछा कि क्या महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के चुनावों में चुनाव आयोग की भूमिका का कोई राजनीतिक असर पड़ा है।
पटोले ने आगे देश में लोकतंत्र और वोटरों के अधिकारों पर असर पड़ने का आरोप लगाते हुए सरकार पर और तीखा हमला बोला। उनके मुताबिक किसान, मजदूर, बेरोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे कई क्षेत्रों में दिक्कतें गंभीर होती जा रही हैं।
इस बीच सूखे के मद्देनजर किसानों को जल्द से जल्द मदद मिले, इसके लिए कांग्रेस की तरफ से सरकार पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार नाना पटोले की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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