मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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15:47 IST

चुनाव आयुक्त नियुक्ति केस: सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की राय अलग-अलग, मामला CJI के पास जाएगा

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में सीजेआई को शामिल करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच का फैसला बंटा, मामला पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजे जाने की संभावना पर विचार।

चुनाव आयुक्त नियुक्ति केस: सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की राय अलग-अलग, मामला CJI के पास जाएगा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चुनाव आयुक्तों (Election Commissioners) की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के सरन्यायाधीश (CJI) को शामिल करने की मांग करने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच का फैसला बंटा हुआ आया है। इस बेंच में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा शामिल थे, और दोनों जजों ने इस मामले पर अलग-अलग राय रखी।

दोनों जजों ने सरन्यायाधीश से गुजारिश की है कि इस मामले में जो संवैधानिक सवाल उठे हैं, उन पर विचार करने के लिए पांच जजों की स्थायी संविधान पीठ बनाने की संभावना देखी जाए। इससे पहले केंद्र सरकार भी यह मांग कर चुकी है कि यह मामला पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाए।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस मामले को सीधे पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजने की मांग को मानने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने यह राय जरूर दी कि इस विषय पर अगली सुनवाई के लिए मामला तीन जजों की बेंच के पास भेजा जाए।

जजों की नियुक्ति के लिए जो कॉलेजियम सिस्टम है, उस पर दिए गए तर्क पर भी जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी फैलाई जा रही है कि सिर्फ जज ही जजों की नियुक्ति करते हैं। जस्टिस दत्ता ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकारों से बातचीत होती है और खुफिया एजेंसियों से भी रिपोर्ट ली जाती है। उन्होंने कहा कि एक-दो नियुक्तियों को लेकर पूरे सिस्टम पर सवाल उठाना ठीक नहीं है।

याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह दलील दी गई थी कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए चुनाव आयुक्तों का चुनाव निष्पक्ष तरीके से होना जरूरी है। उनका कहना था कि अगर चयन समिति में प्रधानमंत्री के साथ उनके नामित प्रतिनिधि भी शामिल हों, तो चयन प्रक्रिया सरकार की तरफ झुकने की संभावना रहती है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि तीन सदस्यीय समिति में विपक्ष के नेता की भूमिका सिर्फ औपचारिक बनकर रह सकती है। जस्टिस दत्ता ने कहा कि इस दलील में दम है।

वहीं जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने अपना आदेश पढ़ते हुए जस्टिस दत्ता की राय से असहमति जताई। जस्टिस शर्मा ने बताया कि पहले जब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर कोई साफ व्यवस्था नहीं थी, तब उस खाली जगह को भरने के लिए कोर्ट ने प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और सरन्यायाधीश वाली समिति की व्यवस्था बनाई थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं, क्योंकि संसद इस बारे में कानून बना चुकी है। इसलिए जस्टिस शर्मा की राय थी कि यह मामला सरन्यायाधीश के सामने रखा जाए और वे पांच जजों की संविधान पीठ बनाएं।

मतभेद के बावजूद जस्टिस दत्ता ने भी कहा कि अगली सुनवाई के लिए यह मामला सरन्यायाधीश के पास भेजना ठीक रहेगा। याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई थी कि संविधान पीठ के पास भेजे गए मामले अक्सर सालों तक लटके रहते हैं। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस मामले की सुनवाई जल्दी हो जाएगी।

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