ठाणे में उद्धव ठाकरे गुट के विभागप्रमुख प्रदीप पूर्णेकर की गोली मारकर हत्या
ठाणे के घोडबंदर इलाके में मंगलवार रात शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के विभागप्रमुख प्रदीप पूर्णेकर पर उनके दफ्तर में हमला हुआ। अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
ठाणे के घोडबंदर इलाके में मंगलवार, 29 सितंबर की रात अचानक गोलियां चलने की आवाज आई। कुछ ही देर में पता चला कि एक स्थानीय राजनीतिक नेता पर जानलेवा हमला हुआ है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट के विभागप्रमुख प्रदीप पूर्णेकर उर्फ बाळू दादा पर उनके दफ्तर में ही हमला किया गया। 6 गोलियां चलाई गईं और धारदार हथियार से भी वार किए गए। खून से लथपथ पूर्णेकर को फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
घटना घोडबंदर के गणेशनगर में रात करीब साढ़े नौ बजे हुई। उस वक्त इलाके में रोज की तरह लोगों की आवाजाही थी। कोई घर के बाहर बातें कर रहा था, कोई दुकानों में खड़ा था। गोलियों की आवाज सुनकर लोग उसी तरफ दौड़े और सामने का नजारा देखकर सबको झटका लगा।
गोलीबारी पूर्णेकर के दफ्तर में हुई थी। वे मानपाडा, आजादनगर और मनोरमानगर इलाके में सक्रिय थे और स्थानीय स्तर पर उन्हें बाळू दादा के नाम से जाना जाता था। हत्या के बाद इलाके में भारी तनाव है, इसलिए पुलिस बंदोबस्त भी बढ़ा दिया गया है।
पुलिस इलाके के CCTV फुटेज खंगाल रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बाइक पर आए हमलावरों ने पूर्णेकर को निशाना बनाया और वारदात के बाद मौके से फरार हो गए। पुलिस ने पप्या शिंदे समेत दो लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि तीन की तलाश जारी है। पुलिस आरोपियों की हरकतों, घटनास्थल और उनके संभावित ठिकानों पर नजर रखे हुए है।
इस मामले में निखिल यादव, पप्या शिंदे, आकाश निमसे, संतोष कनोजिया और एक और व्यक्ति का नाम संदिग्ध के तौर पर सामने आया है। बताया गया है कि दो संदिग्ध हिरासत में हैं और बाकी की तलाश चल रही है। हालांकि इन सबकी सही भूमिका जांच से साफ होना अभी बाकी है।
पूर्णेकर की मौत की खबर फैलते ही उनके समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं में गुस्सा फैल गया। अस्पताल के बाहर बड़ी भीड़ जमा हो गई और आरोपियों को फौरन पकड़ने की मांग उठी। कुछ देर रास्ता रोकने की कोशिश भी हुई। ऐसे में पुलिस के सामने एक तरफ आरोपियों को ढूंढने और दूसरी तरफ इलाके में कानून-व्यवस्था संभालने की चुनौती है।
प्रदीप पूर्णेकर ठाणे की स्थानीय राजनीति में जाना-पहचाना नाम थे। उनके परिवार की भी स्थानीय राजनीति में पृष्ठभूमि है। उनके भाई जयनाथ पूर्णेकर पूर्व नगरसेवक बताए जाते हैं। हाल के ठाणे महानगरपालिका चुनाव में पूर्णेकर परिवार के सदस्यों ने ठाकरे गुट से चुनाव लड़ा था।
पूर्णेकर के परिवार ने ठाणे की पूर्व महापौर मीनाक्षी शिंदे और उनके पति राजेंद्र शिंदे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार के मुताबिक पूर्णेकर की जान स्थानीय राजनीतिक विवाद में गई होगी और उन्हें शक है कि हमलावरों को राजनीतिक समर्थन मिला। प्रदीप पूर्णेकर के बेटे राम पूर्णेकर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हत्या से पहले उनके पिता की रेकी की गई थी और उन्हें पहले धमकियां मिली थीं। उन्होंने राजनीतिक विवाद के साथ ड्रग्स के एंगल की भी आशंका जताई है।
ये परिवार के लगाए आरोप हैं। अब तक जांच से इनकी पुष्टि नहीं हुई है और मीनाक्षी शिंदे या राजेंद्र शिंदे का हत्या में शामिल होना साबित नहीं हुआ है। इन आरोपों की सच्चाई और हत्या का असली मकसद पुलिस जांच से ही साफ होगा।
पुलिस यह देख रही है कि स्थानीय राजनीति की खींचतान, चुनाव की होड़ या दबदबे के झगड़े से इस हत्या का कोई संबंध है या नहीं। पुरानी रंजिश या स्थानीय विवाद की संभावना भी है। पुलिस ने कहा है कि वह सभी संभावनाएं जांचेगी। परिवार का दावा है कि पूर्णेकर कुछ गैरकानूनी धंधों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, इसलिए इस पहलू की भी जांच हो सकती है। क्लस्टर डेवलपमेंट और स्थानीय दबदबे के विवाद का भी जिक्र हुआ है, लेकिन इन दावों की फिलहाल आधिकारिक जांच से पुष्टि नहीं हुई है।
अभी CCTV, चश्मदीदों, तकनीकी सबूतों और संदिग्धों से पूछताछ के जरिए पुलिस सवालों के जवाब ढूंढ रही है। आरोपी कब से तैयारी कर रहे थे, क्या उन्होंने इलाके की रेकी की थी, दफ्तर में पूर्णेकर की मौजूदगी की जानकारी हमलावरों को किसने दी और इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था या नहीं, यह सब जांच का हिस्सा है। हत्या का असली कारण जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।