फॉर्म-6 विवाद: आव्हाड ने फाड़ा फॉर्म, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों के बीच NCP (शरदचंद्र पवार) विधायक जितेंद्र आव्हाड ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में फॉर्म-6 फाड़कर विरोध जताया।
केंद्रीय चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद को लेकर देश की राजनीति में हलचल मच गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले आयोग में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंग संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। यह आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने, दोबारा नाम जोड़ने, SIR और फॉर्म-6 में हुए बदलावों से जुड़ी बताई जा रही हैं।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेर लिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्ञानेश कुमार पर जमकर निशाना साधा और आयोग के कामकाज पर ही गंभीर सवाल खड़े किए।
आव्हाड ने हाथ में फॉर्म नंबर 6 लेकर उसे फाड़ दिया और इस तरह चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध जताया। SIR और फॉर्म-6 में हुए बदलावों को लेकर उन्होंने आयोग पर कई आरोप लगाए। ज्ञानेश कुमार पर तंज कसते हुए उन्होंने उन्हें पद से हटाने की मांग की।
आव्हाड ने चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए लोगों से मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर आवाज उठाने की अपील की। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार दबाव में काम कर रहे हैं। स्पष्ट है कि ये सभी आरोप आव्हाड के अपने राजनीतिक दावे हैं।
इसी बीच रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणाएं शामिल किए जाने के मुद्दे पर चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति जताई थी। सामने आई जानकारी के अनुसार संधू ने इस बदलाव को "गैर-अधिकृत" और "गैरकानूनी" बताया था। एनसीपी (एसपी) के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता जितेंद्र आव्हाड ने ठाणे में कहा कि यह मामला सिर्फ ज्ञानेश कुमार तक सीमित नहीं है, उनसे पहले आयुक्त राजीव थे, और उससे भी पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था, तब भी ऐसी बात कही गई थी।
इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद होने के दावे को खारिज कर दिया है। आयोग के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि SIR सहित सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से और सर्वसम्मति से लिए गए हैं। यानी एक तरफ 14 लिखित आपत्तियों की रिपोर्ट है, तो दूसरी तरफ आयोग का यह स्पष्टीकरण कि सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए हैं, ऐसी स्थिति फिलहाल बनी हुई है।
इस घटनाक्रम के बाद फॉर्म-6, SIR और मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा और तूल पकड़ने की संभावना है। जहां विपक्ष की ओर से आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं आयोग की ओर से अपने सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाने का दावा किया जा रहा है।
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