एल नीनो फरवरी में चरम पर, फडणवीस बोले हर किसान को मिलेगी मदद
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि महाराष्ट्र में एल नीनो का असर फरवरी तक और बढ़ेगा, वहीं 265 तालुकों में सूखा घोषित कर दिया गया है।
महाराष्ट्र में इस साल बारिश ने धोखा दे दिया और उससे बना सूखे जैसा हाल आने वाले वक्त में और बिगड़ सकता है, क्योंकि एल नीनो का असर अभी और तेज होने वाला है। यह बात खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही। इस दौरान उन्होंने सरकार की तरफ से चल रही उपाययोजनाओं की जानकारी दी और आगे आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार रहने का इशारा भी दिया।
फडणवीस ने बताया कि पैसिफिक महासागर में पैदा होने वाली गर्मी की वजह से एल नीनो बनता है। मौजूदा हालात देखते हुए एक्सपर्ट्स का अंदाजा है कि एल नीनो का असर आगे और बढ़ेगा और फरवरी महीने में यह अपने सबसे ऊंचे स्तर यानी पीक पर पहुंच जाएगा। उनके मुताबिक फरवरी के बाद समुद्र का तापमान कम होने लगेगा और स्थिति धीरे-धीरे पहले जैसी होने लगेगी। लेकिन इस बीच जो भी दिक्कतें और चुनौतियां सामने आएंगी, उनका सामना करने के लिए प्रशासन और आम लोगों को हर तरह से तैयार रहना होगा, यह उन्होंने साफ तौर पर कहा।
दरअसल इस बार मानसून की शुरुआत में राज्य के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हुई थी, लेकिन उसके बाद लंबे वक्त तक बारिश गायब रही, जिससे खेती को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों की मेहनत से तैयार फसल हाथ में आने से पहले ही मौसम की मार से बर्बाद हो गई। इसी वजह से राज्य सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 तालुकों में 'ट्रिगर 1' के तहत सूखा घोषित कर दिया है। यानी करीब 75 प्रतिशत इलाके में सूखा घोषित हो चुका है और अब वहां युद्ध स्तर पर अलग-अलग उपाय लागू करने का काम शुरू हो गया है।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सूखाग्रस्त घोषित इन 265 तालुकों में सरकार की तरफ से सबको बराबर मदद पहुंचाई जाएगी। इसके लिए 12 तुरंत उठाए जाने वाले कदमों को मंजूरी दी जा चुकी है और प्रशासन ने पंचनामे का काम भी तेजी से शुरू कर दिया है। जिन तालुकों के नाम अभी तैयार की गई अस्थायी लिस्ट में शामिल नहीं हैं, वहां भी दोबारा सर्वे किया जाएगा। फडणवीस ने पक्के तौर पर कहा कि 'ट्रिगर 3' के तहत ऐसे इलाकों को भी लिस्ट में जोड़ा जाएगा, ताकि एक भी परेशान किसान सरकारी मदद से वंचित न रह जाए।
पानी को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे मुश्किल हालात में हर किसी को किफायत से काम लेना होगा और जितनी मदद हो सके, सूखाग्रस्त लोगों तक पहुंचानी होगी। उन्होंने हर जिले के लिए अलग से प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत मौजूद पानी के भंडार को जुलाई-अगस्त तक के लिए बचाकर रखा जाएगा, और बाकी बचे पानी का दोबारा इस्तेमाल रबी सीजन की खेती और फैक्ट्रियों के लिए स्थानीय स्तर पर योजना बनाकर किया जाएगा, ताकि पानी की एक भी बूंद बर्बाद न हो।
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