वर्धा जिले में कम बारिश से पानी का संकट गहराने का डर, 519 ग्राम पंचायतों से मांगी रिपोर्ट
जिला परिषद के ग्रामीण पानी सप्लाई विभाग ने 2026-27 के कृती आराखड़े के लिए सभी ग्राम पंचायतों से हालात की जानकारी मांगी है, पर अब तक किसी तहसील से रिपोर्ट नहीं आई।
इस साल वर्धा जिले में बारिश बहुत कम हुई है, इसलिए आने वाले दिनों में यहां पानी का गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
जिला परिषद के ग्रामीण पानी सप्लाई विभाग ने जिले की आठों पंचायत समितियों के तहत आने वाली 519 ग्राम पंचायतों से अपने इलाके में पानी के संकट की स्थिति बताने वाली रिपोर्ट मांगी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर 2026-27 के लिए जलसंकट निवारण उपायों का कृती आराखड़ा बनाया जाएगा। हर साल गर्मियों में पानी की किल्लत होती है और उससे निपटने के लिए प्रशासन ऐसा आराखड़ा तैयार करता है।
आम तौर पर इस आराखड़े को 1 अक्टूबर से 31 जून के बीच तीन चरणों में मंजूरी दी जाती है। 2025-26 में यह मंजूरी दो चरणों में दी गई थी। उस आराखड़े में जिले के करीब 1,015 गांवों के लिए 1,163 उपाय सुझाए गए थे। जानकारी के मुताबिक इनमें से ज्यादातर काम पूरे हो चुके हैं।
जलसंकट निवारण आराखड़े में नए बोरवेल बनाना, पुराने बोरवेल की मरम्मत, नल से पानी सप्लाई वाली योजनाओं की खास मरम्मत और सिंचाई के कुओं की खास मरम्मत शामिल होती है। इसके अलावा निजी कुओं का अधिग्रहण, सार्वजनिक कुओं को और गहरा करना और अधूरी पड़ी पानी सप्लाई योजनाओं के काम पूरे करना भी इसमें आता है।
इस बार जिले के हालात चिंता वाले हैं। औसत से कम बारिश हुई है, जिसका असर आने वाली गर्मियों में दिख सकता है। जानकारी के मुताबिक जिले के 11 जलाशयों में फिलहाल करीब 70 प्रतिशत पानी है।
इस संभावित संकट को देखते हुए पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर ने हाल ही में समीक्षा बैठक ली थी, जिसमें जरूरी उपायों पर चर्चा हुई। जिलाधिकारी वान्मथी सी. भी समय समय पर हालात की समीक्षा कर रही हैं। सितंबर के आखिर में प्रशासन ने आठों पंचायत समितियों के गटविकास अधिकारियों यानी बीडीओ के जरिए सभी 519 ग्राम पंचायतों को निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्र में पानी के संकट की मौजूदा स्थिति पेश करें।
जिला परिषद के ग्रामीण पानी सप्लाई विभाग ने 20 सितंबर को भी बीडीओ के जरिए ग्राम पंचायतों को सूचना दी थी। 2026-27 के आराखड़े के लिए जरूरी 'प्रपत्र व गोषवारा' जमा करने को कहा गया था। लेकिन जानकारी के मुताबिक अब तक एक भी तहसील से रिपोर्ट नहीं आई है।
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