265 तालुकों में सूखा घोषित, पर किसानों के खाते में पैसा दिवाली से पहले आएगा या नहीं
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के 6 महसूल विभागों के 265 तालुकों में सूखे जैसी स्थिति (ट्रिगर-1) लागू करते हुए शासन निर्णय (जीआर) जारी कर दिया है। लेकिन सूखा घोषित होने की खबर से किसानों की चिंता खत्म नहीं हुई, बल्कि एक नया सवाल खड़ा हो गया है कि उनके बैंक खाते में असली मदद की रकम कब जमा होगी। पूरे महाराष्ट्र से यही गुस्सा भरा सवाल पूछा जा रहा है कि क्या किसानों को मदद के लिए दिवाली तक इंतजार करना पड़ेगा।
राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों के किसानों, खेत मजदूरों, छात्रों, आम नागरिकों और जानवरों को राहत देने के लिए कुल 12 उपाय और छूट लागू की हैं। इनमें जमीन के महसूल में छूट, फसल कर्ज का पुनर्गठन और खेती से जुड़े कर्जों की वसूली पर तुरंत रोक शामिल है। 7.5 हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के चालू बिजली बिल में छूट दी गई है, यानी जिन पंपों का बिल पहले से माफ नहीं था उन्हें भी अब राहत मिलेगी, और टंचाई वाले गांवों में खेती के पंपों की बिजली कनेक्शन नहीं काटी जाएगी। प्रभावित इलाकों के स्कूल और कॉलेज के छात्रों की परीक्षा फीस माफ की जाएगी। रोजगार हमी योजना के कामों की शर्तों में ढील देकर ज्यादा से ज्यादा काम शुरू किए जाएंगे और किसानों-मजदूरों को अनाज की पूरी सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी। जहां जरूरत होगी वहां पीने के पानी के लिए टैंकर लगाए जाएंगे, जानवरों के लिए चारे का इंतजाम होगा और पानी बचाने के काम को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
ट्रिगर-1 के तहत आने वाले इन 265 तालुकों में राज्य के सभी बड़े विभाग शामिल हैं। सबसे ज्यादा 74 तालुके छत्रपति संभाजीनगर विभाग से हैं, अमरावती विभाग से 56, नाशिक विभाग से 49, नागपुर विभाग से 39 और पुणे विभाग से 35 तालुके शामिल हैं। ठाणे विभाग से 12 तालुके सूची में हैं, जिनमें रायगड, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों के कुछ तालुके शामिल हैं, जबकि ठाणे और पालघर का एक भी तालुका इसमें नहीं है।
फसल के नुकसान की भरपाई का फैसला इससे अलग होगा। तय प्रक्रिया के तहत पंचनामे और सर्वे पूरा होने के बाद ही अलग शासन निर्णय के जरिए मदद का ऐलान किया जाएगा, इसलिए सरकार ने पंचनामे और फसल की सही स्थिति की जांच को खास तवज्जो दी है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मदद व पुनर्वसन मंत्री मकरंद जाधव पाटील ने साफ किया है कि इस फैसले के बाद प्रभावित तालुकों में फौरन फसलों का सर्वे और पंचनामे शुरू करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं। महसूल और कृषि विभाग को मिलकर काम करते हुए फसलों की हालत दिखाने वाली जियो-टैग फोटो और जीपीएस लोकेशन के साथ रिपोर्ट देना जरूरी किया गया है। मंत्री मकरंद जाधव पाटील ने कहा कि यह मदद डीबीटी के जरिए सीधे किसानों के बैंक खाते में डाली जाएगी और दिवाली से पहले सूखा प्रभावित किसानों के खाते में रकम पहुंच जाएगी।
लेकिन जमीन पर असली सवाल यही है कि जीआर कागज पर भले अच्छा दिखे, इसका असर किसानों की जिंदगी पर तभी पड़ेगा जब यह जल्दी लागू होगा। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संकट के समय किसानों को कागजी प्रक्रिया और सख्त शर्तों में उलझाए रखना बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि चंद्रपुर और गडचिरोली जैसे इलाकों में भयंकर सूखा है, फिर भी ब्रम्हपुरी जैसे तालुके को छोड़ दिया गया है। वडेट्टीवार ने मांग की कि सरकार सारी सख्त शर्तें और ढाई हेक्टर की सीमा तुरंत हटाए और सीधे प्रति हेक्टर 1 लाख रुपये की मदद किसानों के खाते में डाले। उनका आरोप है कि सरकार कागजी नियमों और शर्तों के नाम पर मदद को टालने की नीति चला रही है।
मुख्यमंत्री और मंत्री ने जिलाधिकारियों को तुरंत पंचनामे करने के निर्देश दिए हैं और जियो-टैग फोटो व जीपीएस लोकेशन वाली रिपोर्ट मांगी जा रही है, लेकिन सवाल यही है कि पंचनामे कब होंगे, रिपोर्ट कब मंत्रालय पहुंचेगी और उसके बाद अलग शासन निर्णय कब निकलेगा। इसी लंबी प्रक्रिया में किसान परेशान है। मंत्री दिवाली से पहले खाते में पैसे आने की बात कह रहे हैं, लेकिन असल में यह रकम कब और कैसे पहुंचती है, यह आने वाला समय ही तय करेगा।
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