मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर PIL, सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते सुनेगा
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई के लिए हामी भरी है।
सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इसके लिए सहमति दे दी है। याचिका में पूछा गया है कि चुनाव आयोग में फैसले लेते वक्त दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी थी या नहीं, और आयोग का बहु-सदस्यीय ढांचा असल में कैसे काम कर रहा है।
मंगलवार को यह मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने रखा गया। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस व्ही. मोहना भी शामिल हैं। वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने याचिका का जिक्र किया। इसके बाद चीफ जस्टिस ने कहा, "अगले हफ्ते इसे दर्ज करेंगे," यानी अगले हफ्ते इसे सूचीबद्ध किया जाएगा।
यह PIL पटना के राकेश कुमार सिंह ने दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग के अधिकार सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त के निजी अधिकार नहीं हैं। दावे के मुताबिक आयोग से उम्मीद है कि वह इन अधिकारों का इस्तेमाल सामूहिक तरीके से करे।
याचिका का दावा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच अलग-अलग फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई। खासकर वोटर लिस्ट की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति होने की बात याचिका में कही गई है।
याचिका में Form-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट से जुड़े ERONet/ECINet डेटाबेस के इस्तेमाल, IT काम के बंटवारे और पश्चिम बंगाल में अपील जैसे मुद्दों का भी जिक्र है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की है कि आयोग की बैठकों के एजेंडे, मिनट्स, फाइल नोटिंग, मंजूरी के कागजात, IT सिस्टम से जुड़े रिकॉर्ड और दूसरे प्राथमिक रिकॉर्ड कोर्ट के सामने मंगवाए जाएं।
फिलहाल ये सारे आरोप याचिका में किए गए दावे भर हैं। याचिका में भी यह नतीजा नहीं निकाला गया है कि ये आखिरी तौर पर साबित हो चुके हैं। चुनाव आयोग इससे पहले कह चुका है कि दो आयुक्तों के बीच अलग-अलग राय किसी भी संस्था में चर्चा का आम हिस्सा होती है। आयोग ने यह भी साफ किया है कि उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के मुताबिक हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है।
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