मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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15:47 IST

वर्धा जिले में बारिश 36.92 फीसदी कम, जलाशय भी नहीं भरे, पानी की चिंता

जून से सितंबर के बीच वर्धा जिले में अपेक्षित बारिश से 36.92 टक्के कम पानी गिरा। हिंगणघाट में सबसे कम, सिर्फ 47 टक्के बारिश दर्ज हुई।

वर्धा जिले में बारिश 36.92 फीसदी कम, जलाशय भी नहीं भरे, पानी की चिंता
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

इस साल वर्धा जिले पर बारिश की मेहरबानी नहीं हुई। जून से ही बारिश ने जैसा साथ देना चाहिए था, वैसा नहीं दिया। बीच-बीच में जो बारिश हुई, उसके भरोसे किसानों ने बुवाई का काम निपटा लिया। लेकिन जब फसलों को अगले दौर में पानी की जरूरत थी, तब बारिश फिर गायब हो गई और किसानों की चिंता बढ़ गई।

आम तौर पर जून, जुलाई और अगस्त इन तीन महीनों में जिले में औसतन 719.03 मिमी बारिश होने की उम्मीद रहती है। इस बार इन तीन महीनों में सिर्फ 491.02 मिमी बारिश हुई। यानी औसत के मुकाबले बारिश काफी कम रही।

उम्मीद थी कि सितंबर में शायद यह कमी पूरी हो जाएगी, मगर सितंबर ने भी निराश किया। जून से सितंबर तक चार महीनों में जिले में 874.05 मिमी बारिश अपेक्षित थी, जबकि असल में 558.03 मिमी दर्ज की गई। इस तरह चार महीनों में जिले की बारिश में पूरे 36.92 टक्के की कमी रही। सितंबर में भी कमी बढ़ने से आने वाले दिनों में पानी की हालत को लेकर प्रशासन और नागरिक दोनों की चिंता बढ़ी है।

तहसील के हिसाब से आंकड़े देखें तो हिंगणघाट की हालत सबसे ज्यादा चिंताजनक है, जहां सिर्फ 47 टक्के बारिश दर्ज हुई। उसके बाद सेलू में 63.08 टक्के और समुद्रपुर में 63.03 टक्के बारिश हुई।

आर्वी में 69.06 टक्के, देवळी में 70.05 टक्के, वर्धा में 75.01 टक्के और आष्टी में 76.06 टक्के बारिश दर्ज हुई। कारंजा में सबसे ज्यादा, यानी 82.03 टक्के बारिश रही।

बारिश के गायब रहने की मार सिर्फ खेती पर नहीं पड़ी है। जिले के बड़े और मध्यम जलाशय भी उम्मीद के मुताबिक नहीं भरे हैं। इसलिए आगे पीने के पानी के साथ-साथ खेती के पानी का नियोजन भी बहुत अहम होगा।

अक्टूबर में बारिश अच्छी होगी या नहीं, इसकी अभी कोई गारंटी नहीं है। इसलिए जो पानी मौजूद है, उसे अभी से संभालकर इस्तेमाल करना जरूरी है। अगर बारिश की यह कमी ऐसी ही बनी रही, तो आने वाले समय में पानी के संकट की आहट और तेज होने की आशंका है।

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