नागपुर के MRO में बोइंग 737-800 पर पहली बार लगा नाइट्रोजन जनरेशन सिस्टम
एआईईएसएल के नागपुर MRO ने एयर इंडिया एक्सप्रेस के बोइंग 737-800 में नाइट्रोजन जनरेशन सिस्टम का मॉडिफिकेशन पूरा किया।
विमानों के फ्यूल टैंक को आग से ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। मकसद यह है कि हादसे या आग लगने की हालत में ईंधन के तेजी से आग पकड़ने का खतरा कम हो। इसी कड़ी में एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईईएसएल) के एमआरओ ने एक अहम काम पूरा किया है।
एआईईएसएल के एमआरओ ने एयर इंडिया एक्सप्रेस के बोइंग 737-800 विमान वीटी-एएक्सएम में पहली बार नाइट्रोजन जनरेशन सिस्टम का मॉडिफिकेशन कामयाबी से पूरा किया। यह विमान कन्नूर से आया था। मॉडिफिकेशन के बाद इसने रात 7 बजे कन्नूर के लिए टेकऑफ किया।
फ्यूल टैंक में ईंधन के ऊपर जो खाली जगह होती है, वहां ज्वलनशील वाष्प और ऑक्सीजन मौजूद रहती है। आग लगने की हालत में यह खतरा बढ़ा सकती है। नाइट्रोजन जनरेशन सिस्टम का मकसद टैंक के माहौल में ऑक्सीजन की मात्रा को काबू में रखना है। इससे आग लगने या फैलने की संभावना घटाने में मदद मिलती है।
बोइंग 737-800 में इस सिस्टम का पहली बार सफल मॉडिफिकेशन एआईईएसएल के इंजीनियरिंग और एमआरओ संचालन के लिए बड़ी उपलब्धि है। उम्मीद है कि इससे कंपनी की विमान मॉडिफिकेशन और मेंटेनेंस की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
विमानन विशेषज्ञों के मुताबिक फ्यूल टैंक की सुरक्षा में यह तकनीकी सुधार अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन मानकों के अनुरूप है। नाइट्रोजन जनरेशन सिस्टम (NGS) चालू होने पर ईंधन टैंक के अंदर अक्रिय गैस का दबाव बना रहता है। इससे किसी अचानक घर्षण या आपात हालत में आग फैलने का खतरा लगभग नगण्य हो जाता है।
एआईईएसएल ने इस आधुनिक तकनीक को कामयाबी से लागू किया है, इसलिए घरेलू विमानन उद्योग में मुसाफिरों की सुरक्षा का स्तर और ऊपर जाएगा।
नागपुर की एआईईएसएल एमआरओ सुविधा में इस पेचीदा इंजीनियरिंग काम का सफल होना बताता है कि यह केंद्र अब बड़े स्तर के बोइंग विमानों के तकनीकी बदलाव करने में पूरी तरह सक्षम है।
इस उपलब्धि के बाद एयर इंडिया एक्सप्रेस समेत दूसरी बड़ी एयरलाइंस के और विमानों को ऐसे सुरक्षा अपग्रेड के लिए नागपुर लाने का रास्ता खुल गया है। इससे मध्य भारत में नागपुर एविएशन मेंटेनेंस और ओवरहाल के बड़े हब के तौर पर और मजबूती से उभरेगा।