रविवार, 1 नवंबर 2026

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जरांगे मुंबई कूच पर शिंदे की अपील: फैसले पर दोबारा सोचें, गणेशोत्सव में बाधा न आए

जरांगे मुंबई कूच पर शिंदे की अपील: फैसले पर दोबारा सोचें, गणेशोत्सव में बाधा न आए तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर मुंबई जा रहे मनोज जरांगे पाटील से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य का माहौल फिर गरमा गया है और मनोज जरांगे पाटील मुंबई की तरफ रवाना हो चुके हैं। मुंबई पुलिस ने आझाद मैदान पर आंदोलन की इजाजत नहीं दी है, फिर भी जरांगे मुंबई की ओर बढ़ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सरकार का रुख साफ करते हुए आंदोलनकारियों से सहयोग की अपील की है।

शिंदे ने कहा कि सरकार चार कदम आगे बढ़ रही है, इसलिए मनोज जरांगे पाटील को भी सहयोग की भूमिका लेनी चाहिए। इस वक्त मुंबई में गणेशोत्सव चल रहा है और लाखों गणेशभक्त तथा हजारों गणेश मंडल इस उत्सव में शामिल हैं। शिंदे ने साफ कहा कि सरकार की मंशा यही है कि आंदोलन की वजह से गणेशभक्तों या आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

शिंदे ने याद दिलाया कि इससे पहले मराठा समाज के 58 मोर्चे मुंबई में निकल चुके हैं, जिनमें लाखों लोग शामिल हुए थे, लेकिन उस दौरान इस बात का ध्यान रखा गया था कि दूसरे समाज या नागरिकों को कोई तकलीफ न हो। इसी आधार पर उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि मुंबई आने के इस फैसले पर दोबारा सोचा जाए।

मराठा आरक्षण के मसले पर सरकार शुरू से ही सकारात्मक रही है, ऐसा दावा एकनाथ शिंदे ने किया। उनके मुताबिक, सरकार ने मराठा समाज को 10 प्रतिशत SEBC आरक्षण दिया है, जिसका फायदा छात्र और युवा उठा रहे हैं। उन्होंने कोर्ट की रोक की वजह से अटकी हुई 5300 नियुक्तियों का भी जिक्र किया।

कुणबी दस्तावेज रखने वाले मराठा समाज के लोगों को प्रमाणपत्र देने के लिए जस्टिस शिंदे कमेटी बनाई गई थी, और उन्होंने बताया कि लाखों लोगों को कुणबी प्रमाणपत्र मिल चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने सारथी, स्कॉलरशिप, हॉस्टल की सुविधा और अण्णासाहेब पाटील आर्थिक विकास महामंडल की योजनाओं का भी उल्लेख किया।

मनोज जरांगे की सरकार पर आलोचना को लेकर शिंदे ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करने और आंदोलन करने का अधिकार हर किसी को है, लेकिन आंदोलन के जरिए समाज के हित की भूमिका बनाए रखनी चाहिए और इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।

शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि मराठा समाज को न्याय देते वक्त किसी और समाज के साथ अन्याय न हो, यही सरकार की भूमिका है। उन्होंने कहा कि कुछ मांगें कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए आंदोलनकारियों को भी इस पहलू पर विचार करना चाहिए।

अब मनोज जरांगे के मुंबई पहुंचने के बाद वे आगे क्या भूमिका लेते हैं और सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच फिर से बातचीत होती है या नहीं, इस पर सबकी नजर टिकी है।

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