गणेशपेठ के टेक्सटाइल पार्क में क्रेन गिरी, दो मजदूरों की मौत, दो घायल
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर के गणेशपेठ में म्हाडा की निर्माणाधीन इमारत की साइट पर 40 मीटर ऊंची क्रेन गिरने से दो मजदूरों की जान गई और दो घायल हुए।
नागपुर के गणेशपेठ इलाके में टेक्सटाइल पार्क की एक निर्माण साइट पर शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। म्हाडा की निर्माणाधीन इमारत के काम में इस्तेमाल हो रही करीब 40 मीटर ऊंची क्रेन अचानक गिर पड़ी। इस हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो और मजदूर घायल हुए।
मरने वालों में विश्वनाथ कठाणे (40, निवासी गोंदिया) और मुकेश निषाद (निवासी जौनपुर, उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। घायलों के नाम मंतुराम (26, निवासी छत्तीसगढ़) और महेश मिस्त्री हैं। हादसे के बाद साइट पर अफरा-तफरी मच गई।
शुक्रवार सुबह मजदूर रोज की तरह काम पर आए थे। सुबह करीब 10.30 से 11 बजे के बीच 40 मीटर ऊंची क्रेन को खड़ा करने का काम चल रहा था। उसी दौरान क्रेन का संतुलन बिगड़ा, वह एक तरफ झुकी और सीधे नीचे आ गिरी।
क्रेन नीचे काम कर रहे मजदूरों के ऊपर गिरी। सब कुछ इतनी अचानक हुआ कि उन्हें खुद को बचाने का मौका ही नहीं मिला। इस प्रोजेक्ट का ठेका बी. जे. शिर्के कंपनी को दिया गया है। हादसे के वक्त क्रेन रामजी प्रजापती चला रहे थे।
खबर मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम फौरन मौके पर पहुंच गई। 26 साल के मंतुराम क्रेन के मलबे में फंसे हुए थे। उन्हें निकालने के लिए फायर ब्रिगेड के जवानों ने खास अभियान चलाया। फायर अधिकारी सुनील डोकरे, भगवान वाघ, अकलीम शेख, विलास तिलगुळे और देवानंद शामकुळे ने मौके पर बचाव का काम शुरू किया।
ड्राइवर गणेश राजुरकर और ठेके पर काम करने वाले फायर कर्मचारी नीलेश टेठे ने जान की परवाह किए बिना क्रेन पर चढ़कर फंसे हुए मजदूर तक पहुंचने की कोशिश की। स्ट्रेचर की मदद से मंतुराम को नीचे उतारा गया और फौरन अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाकी घायलों को भी इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
हादसे के बाद गणेशपेठ पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा किया। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। जांच अधिकारी अतुल तावले ने अपनी टीम के साथ घटनास्थल का मुआयना किया। क्रेन गिरने की सही तकनीकी वजह क्या थी, इसका पता लगाया जा रहा है।
इसके अलावा यह भी जांचा जा रहा है कि साइट पर मजदूरों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए गए थे या नहीं और सुरक्षा के मानकों का पालन हो रहा था या नहीं। इस हादसे से निर्माण साइटों पर मजदूरों की सुरक्षा का सवाल एक बार फिर सामने आ गया है।
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