बारिश की कमी से फसलें सूखीं, त्योहारों में दाल-दूध-सब्जी के दाम बढ़ने के आसार
महाराष्ट्र में लंबे समय से बारिश गायब रहने से खरीफ की फसलें सूख गई हैं, जिससे सूखे और पानी की किल्लत का खतरा फिर मंडराने लगा है।
महाराष्ट्र में बारिश के लंबे ब्रेक की वजह से खेती की फसलों को भारी नुकसान हुआ है, और राज्य पर एक बार फिर भयंकर सूखे और पानी की किल्लत का साया मंडराने लगा है। बारिश की बेतरतीबी ने सिर्फ किसानों को ही मुश्किल में नहीं डाला, बल्कि आने वाले वक्त में आम आदमी की जेब पर भी बड़ी मार पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। बाजार में सब्जियों से लेकर अनाज और दूध तक के दाम में बड़ी बढ़ोतरी होने का डर अर्थशास्त्री, सीनियर पत्रकार और नीति विश्लेषक जी चंद्रशेखर ने जताया है।
अगस्त और सितंबर महीने में बारिश ने दगा दे दिया, जिससे खरीफ सीजन की फसलें सूखने लगी हैं। सोयाबीन, कपास, दालें और सब्जियों के उत्पादन पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा है। कई इलाकों में कुएं और बोरवेल का पानी का लेवल नीचे चला जाने से हाथ में आई फसल बर्बाद होने की कगार पर है। उत्पादन घटने से बाजार में आवक धीमी पड़ेगी, और मांग वैसी ही बनी रहने से महंगाई भड़कने की आशंका खारिज नहीं की जा सकती।
सूखे में क्या-क्या महंगा होने का अंदाजा है, इसे कई हिस्सों में देखा जा सकता है। सबसे पहले सब्जियां: पत्तेदार और फल वाली सब्जियों की आवक घटने से खुदरा बाजार में सब्जी के दाम दोगुने होने का अंदाजा है। दूसरा, खाने का तेल और दालें: सोयाबीन और दलहन का उत्पादन घटने से खाद्य तेल और तूर, मूंग, चना जैसी दालों के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई छू सकते हैं। तीसरा, दूध और दुग्ध पदार्थ: बारिश न होने से चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, हरा चारा न मिलने से दुधारू जानवरों का दूध उत्पादन घटेगा और दूध के दाम बढ़ने के संकेत हैं। चौथा, अनाज और चावल: खरीफ की अनाज फसलों को लगी चोट से चावल और ज्वार-बाजरा के भाव भी बढ़ सकते हैं।
राज्य के बड़े बांधों में पानी का स्टॉक पिछले साल के मुकाबले कम होने से पीने के पानी और खेती के पानी का गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। कई ग्रामीण इलाकों में अभी से पानी के टैंकर शुरू करने की नौबत आ गई है, और चारा छावनी बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
एक तरफ त्योहारों के दिन नजदीक आ रहे हैं, तो दूसरी तरफ बारिश के ब्रेक से बनी यह स्थिति गृहिणियों और आम परिवारों का बजट बिगाड़ने वाली साबित होगी। सरकार तुरंत सूखे जैसी हालात का ऐलान करे और किसानों को आर्थिक मदद के साथ-साथ बाजार के दाम काबू में रखने के लिए कदम उठाए, यह मांग अब जोर पकड़ने लगी है।
महाराष्ट्र में बारिश के लंबे ब्रेक से खरीफ फसलों का भारी नुकसान हुआ है, और आने वाले 7-8 महीनों के लिए पीने के पानी और चारे की गंभीर किल्लत खड़ी हो गई है। इस पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है। आज से खेतों में सीधे पंचनामे और सर्वे शुरू हो रहे हैं, और आने वाले शनिवार से पहले सूखे की पहली अधिसूचना जारी होने की संभावना है। सूखा निवारण के लिए उपसमिति बनाई गई है और मंत्रियों के दौरे भी तय किए गए हैं। फिलहाल सरकार को पंचनामे, मदद, चारा और पानी के नियोजन पर एक साथ काम करना पड़ रहा है। इन सारे उपायों के बीच संकट में फंसे किसानों को आखिर कौन सी और कितनी मदद मिलती है, इस पर अब सबकी नजर टिकी है।
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