मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

महाराष्ट्र में सूखे पर फैसला अक्टूबर में, मदद मंत्री मकरंद पाटील का बयान

बारिश की कमी से परेशान किसानों को राहत के लिए फौरन सूखा घोषित करने की मांग हो रही है, लेकिन सरकार ने कहा है कि फैसला अक्टूबर में ही होगा।

महाराष्ट्र में सूखे पर फैसला अक्टूबर में, मदद मंत्री मकरंद पाटील का बयान
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

राज्य में बारिश ने दगा दे दिया है और इससे परेशान किसान सरकार से मांग कर रहे हैं कि सूखा फौरन घोषित किया जाए। लेकिन मदद और पुनर्वसन मंत्री मकरंद पाटील के एक बयान से अन्नदाता यानी किसानों की चिंता और बढ़ गई है। पाटील ने साफ कहा है कि सूखे को लेकर फैसला अक्टूबर महीने में होगा। इसका मतलब यह हुआ कि विरोधी पक्ष जिस तरह तुरंत सूखा घोषित करने की मांग कर रहा था, वैसा फौरन होने की संभावना अब कम दिख रही है।

पड़ोसी राज्य कर्नाटक ने सूखा घोषित करने के साथ-साथ किसानों के अलग-अलग सवालों पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र भी बुलाया है। इसी को देखते हुए मांग हो रही है कि महाराष्ट्र में भी तय नियम-कायदों को अलग रखकर सूखा घोषित किया जाए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि सूखा घोषित करने को लेकर फैसला 5 अक्टूबर के बाद लिया जाएगा। इसी पृष्ठभूमि में मंत्री पाटील ने भरोसा दिलाया है कि इस सीजन में जिन गांवों को नुकसान हुआ है, वहां का कोई भी किसान मदद से वंचित नहीं रहेगा।

मकरंद पाटील ने जानकारी देते हुए बताया कि सूखे की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा और इसके लिए बारिश, वनस्पति सूचकांक, बुआई का क्षेत्र, मिट्टी की नमी और भूजल स्तर को आधार बनाया जाएगा। इसके साथ-साथ चारे की उपलब्धता, पीने के पानी की किल्लत, रोजगार की मांग और पलायन जैसे सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर भी गौर किया जाएगा। पाटील के मुताबिक, खरीफ सीजन के लिए सूखा घोषित करने का फैसला अक्टूबर में लिया जाएगा, जबकि रबी सीजन के लिए 31 मार्च की अंतिम तारीख तय की गई है।

अगर किसी गांव में सूखे जैसी पानी की किल्लत पैदा होती है तो वहां तुरंत टैंकर शुरू करने का अधिकार स्थानीय स्तर पर दिया गया है। मदद और पुनर्वसन मंत्री ने यह भी बताया कि कृषि आयुक्त की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय सूखा निगरानी समिति काम कर रही है, वहीं जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिलास्तरीय निगरानी समिति भी सक्रिय है।

दूसरी तरफ, इस मुद्दे पर विपक्ष आक्रामक हो गया है। शिवसेना ठाकरे गुट के विधायक अंबादास दानवे ने विधानमंडल का अधिवेशन बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का बड़ा हिस्सा सूखे की मार झेल रहा है और इस पर तुरंत उपाय करने की जरूरत है।

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