मनोज जरांगे पाटील के करीबियों के आर्थिक लेनदेन आयकर विभाग की जांच के दायरे में
मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं, रिश्तेदारों और कारोबारी सहयोगियों के आर्थिक व्यवहारों की छानबीन शुरू, सरकारी कंत्राट भी जांच के घेरे में
मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर एक बार फिर मनोज जरांगे पाटील से जुड़े आर्थिक मामले चर्चा में आ गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक आयकर विभाग ने आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं, रिश्तेदारों और कारोबारी सहयोगियों के आर्थिक व्यवहारों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस जांच में आयकर रिटर्न, संपत्ति, बड़े आर्थिक लेनदेन और कारोबारी रिश्तों को खंगाला जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक आंदोलन से जुड़े लोगों या उनके रिश्तेदारों से संबंधित कंपनियों को मिले सरकारी कंट्रैक्ट की भी पड़ताल की जा रही है। इसमें कंट्रैक्ट की बोली की प्रक्रिया, कंपनी के टर्नओवर में हुए बदलाव और जुड़े हुए कारोबारी लेनदेन शामिल बताए गए हैं।
छत्रपती संभाजीनगर की एक कारोबारी संस्था को मिले करीब 764.7 करोड़ रुपये के सरकारी कामों को लेकर लगे आरोपों की भी जांच चल रही है, ऐसा अधिकारियों के हवाले से बताया गया है। हालांकि इसी सूत्र के मुताबिक अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि इन कंट्रैक्ट में किसी राजनीतिक फायदे या "क्विड प्रो क्वो" का कोई सबूत अभी सामने नहीं आया है।
अधिकारियों के अनुसार संबंधित कारोबार ने 2016 से 2023 के बीच कुल 259 काम किए थे, जिनकी कुल कीमत करीब 764.7 करोड़ रुपये आंकी गई है। 2023 में यह कारोबार एक प्राइवेट कंपनी में बदल गया था। इसी वजह से कंट्रैक्ट की पूरी पृष्ठभूमि और पहले के काम के अनुभव को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
मनोज जरांगे पाटील के पूर्व सहयोगी अजय बारस्कर पहले भी आंदोलन से जुड़े आर्थिक लेनदेन पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। बारस्कर ने जरांगे और उनके कुछ सहयोगियों के आर्थिक व्यवहारों की जांच की मांग की थी। बताया जा रहा है कि सितंबर में बारस्कर ने इस मामले में ईडी से भी शिकायत की थी।
बारस्कर ने जरांगे और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के बीच बंद कमरे में हुई बातचीत पर भी सवाल उठाए थे। आंदोलन के दौरान कुछ लेनदेन और कंट्रैक्ट को लेकर बारस्कर की ओर से आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप बारस्कर ने लगाए हैं और इनकी सच्चाई जांच एजेंसियों के नतीजों पर ही निर्भर करेगी।
आयकर विभाग की जांच में संबंधित लोगों की आमदनी, संपत्ति, आर्थिक लेनदेन और कारोबारी रिश्तों की पड़ताल हो रही है। इसके साथ ही संबंधित कंपनियों के सरकारी कंट्रैक्ट, बोली की प्रक्रिया और आर्थिक व्यवहारों का भी रिव्यू किया जा रहा है, ऐसा बताया गया है।
इस बीच इन आरोपों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तो चल रही है, लेकिन इन्हें साबित माना जाना ठीक नहीं होगा। फिलहाल जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक यह आर्थिक छानबीन और आरोपों की पृष्ठभूमि में चल रही जांच की एक प्रक्रिया भर है। अब सबकी नजर आयकर विभाग की आगे की जांच के नतीजों पर टिकी है।
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