जरांगे पाटील के मुंबई आंदोलन को पुलिस का तीसरी बार इनकार, आज कूच
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अंतरवाली सराटी में चल रहे मनोज जरांगे पाटील के आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। मुंबई जाने का ऐलान करने के बाद मुंबई पुलिस ने तीसरी बार इस आंदोलन को परमिशन देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद मराठा आंदोलकों के बीच आगे की रणनीति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। साथ ही यह बात भी सामने आई है कि जरांगे पाटील के साथियों की तरफ से उन्हें सुझाव दिया गया है कि वे अकेले उपोषण पर बैठने के लिए दोबारा परमिशन मांगें।
जरांगे पाटील के साथी गंगाधर काळकुटे के मुताबिक, सरकार को भी उनकी तबीयत का ख्याल रखते हुए अपना रुख नरम करना चाहिए। काळकुटे ने बताया कि जरांगे पाटील दो कदम पीछे आ चुके हैं, अब सरकार को भी दो कदम पीछे आकर उन्हें उपोषण की इजाजत देनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मैदान पर उपोषण के लिए चार से पांच लोग जाएंगे। काळकुटे ने कहा कि पिछले 17 दिनों से आंदोलन और उपोषण चल रहा है, ऐसे में सरकार मराठा आरक्षण की मांगें मान कर उसका लिखित पत्र दे, उसके बाद ही मनोज जरांगे पाटील उपोषण वापस लेंगे।
जरांगे पाटील ने मुंबई जाने का ऐलान किया था, लेकिन मुंबई पुलिस ने तीसरी बार आंदोलन को परमिशन नहीं दी। इसके बावजूद जरांगे पाटील अपने फैसले पर अड़े हैं और आज सुबह 11 बजे अंतरवाली सराटी से मुंबई की तरफ कूच करने वाले हैं। परमिशन न मिलने के बाद जरांगे पाटील ने आक्रामक रुख अपनाया और आरोप लगाया कि सरकार अलग चाल चल रही है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे तय रास्ते से ही मुंबई की तरफ जाएंगे।
जरांगे पाटील ने आंदोलकों को जरूरी निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि वे अकेले मुंबई जाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मराठा आंदोलक मुंबई न आएं। उन्होंने कहा, "कल सुबह मैं अंतरवाली से मुंबई के लिए निकलूंगा।" उन्होंने बताया कि उनके सफर का पहला पड़ाव बीड जिले के पाटोदा में होगा। साथ ही कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि जिस भी जगह पड़ाव होगा, वहां अंतरवाली सराटी की तरह मंच खड़ा किया जाए।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार आगे क्या रुख अपनाती है। एक तरफ मुंबई पुलिस ने आंदोलन को परमिशन देने से मना कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ जरांगे पाटील मुंबई की तरफ जाने के अपने फैसले पर कायम हैं। ऐसे में मनोज जरांगे पाटील के अगले कदम पर पूरे मराठा समाज के साथ साथ पूरे राज्य की निगाहें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सरकार और आंदोलकों के बीच कोई रास्ता निकलता है या फिर आंदोलन और तेज हो जाता है।
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