7/12 कोरा करने के वादे का क्या हुआ, कांग्रेस ने फडणवीस से पूछा सवाल
महाराष्ट्र में सूखे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा महायुती सरकार पर निशाना साधा है।
महाराष्ट्र में सूखे की हालत बहुत गंभीर हो गई है, और कहा जा रहा है कि यह 1972 के सूखे से भी ज्यादा बुरा है। किसान बड़ी मुसीबत में हैं और सरकार से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन भाजपा की फडणवीस सरकार अभी तक सिर्फ अभ्यास करने में ही लगी है। किसानों का गुस्सा देखकर आखिरकार मुख्यमंत्री खुद खेतों के बांध पर पहुंचे, लेकिन इससे क्या फायदा होगा, यह सवाल कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने उठाया है।
मुख्यमंत्री के सूखा दौरे पर बोलते हुए अतुल लोंढे ने कहा कि भाषण से सिर्फ राजनीति साधी जा सकती है, लेकिन असल हालात का सामना करने की हिम्मत उसमें नहीं होती, और भाजपा महायुती सरकार के बारे में यही कहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा की अगली पीढ़ी को सूखा नहीं देखना पड़ेगा, यह बात देवेंद्र फडणवीस अब तक कई बार दोहरा चुके हैं। लोंढे ने कहा कि आज मुख्यमंत्री का किसानों के बांध पर जाना अच्छी बात है और इसका वे स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि यह 1972 के बाद का सबसे बड़ा सूखा है, ऐसा मुख्यमंत्री ने खुद कहा है, लेकिन 1972 के सूखे से कांग्रेस सरकार ने सीख ली थी और उसी से रोजगार हमी योजना बनी, जिसने लाखों हाथों को रोजगार दिया। यही योजना बाद में केंद्र सरकार ने अपनाई, कानून बनाया और वह मनरेगा बनी। कोरोना के दौरान भी इसी मनरेगा ने रोजगार दिया, लेकिन भाजपा सरकार लगातार इस मनरेगा को कमजोर करने में लगी रही। लोंढे के मुताबिक मनरेगा के फंड में बड़ी कटौती की गई, और अब यह योजना ही खत्म करने का काम भाजपा सरकार कर रही है।
अतुल लोंढे ने कहा कि राज्य में पहले भी भारी बारिश और सूखा आया है, और भाजपा सरकार ने सच में किसानों की कितनी मदद की, यह मुख्यमंत्री को खुद किसानों से पूछना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा महायुती सरकार ने जो कर्जमाफी की थी, वह भी धोखा निकली, यही किसानों से सुनने को मिलेगा। लोंढे ने सवाल किया कि क्या भाजपा सरकार इससे सबक लेगी, क्या कुछ नया करेगी, और सूखे का सामना करने के लिए सरकार के पास कौन सी ठोस योजनाएं हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि 2014 में जो 49 हजार करोड़ की वॉटर ग्रिड योजना घोषित की गई थी, उसका क्या हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय किसानों के लिए कई योजनाएं लाई गईं और उन्हें लागू भी किया गया। शरद पवार जब मुख्यमंत्री थे, तब कम पानी में टिकने वाली फलोद्यान योजना लाई गई, और उसके बाद महाराष्ट्र में फूड प्रोसेसिंग में बड़ी क्रांति आई।
लोंढे के मुताबिक भाजपा सरकार के 12 साल के कार्यकाल में खेती के क्षेत्र में ऐसा कुछ होता नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि आज मुख्यमंत्री बांध पर गए हैं, किसानों की समस्याएं करीब से देखी होंगी, उनका दुख समझा होगा, तो शायद कुछ अच्छा हो, वरना फिर वही पुरानी बात, "फिर वही मेरा पुराना राग", ऐसा न हो, यही उम्मीद है। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने यह बात कही।
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