अहिल्यानगर के चापडगांव में सूखे से हालात 1972 से भी बदतर, गांव छोड़ने की नौबत
अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तालुका के चापडगांव में विहिरें तल तक सूख गई हैं, फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और जानवरों के लिए चारा-पानी तक नहीं बचा है।
अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तालुका के चापडगांव में इस बार सूखे ने ऐसा रूप ले लिया है कि किसान गांव छोड़ने की बात करने लगे हैं। खेती के लिए पानी को जीवनरेखा माना जाता है, लेकिन यहां लंबे समय से बारिश गायब है और गर्मी की मार अलग से पड़ रही है। इसी वजह से पीने के पानी से लेकर जानवरों के चारे तक हर मोर्चे पर संकट खड़ा हो गया है, और किसान व ग्रामीण पूरी तरह हताश हो चुके हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो पानी और चारे की तलाश में जानवरों समेत गांव छोड़कर जाना पड़ सकता है।
गांव के पानी के सारे स्रोत बारिश न होने की वजह से सूख चुके हैं। कई विहिरें बिल्कुल कोरी हो गई हैं, जिससे पीने के पानी की गंभीर दिक्कत खड़ी हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक एक हांडी पानी भरने के लिए भी महिलाओं और ग्रामीणों को इधर-उधर भागना पड़ रहा है। खेती के लिए पानी न मिलने से खड़ी फसलें भी नहीं बचाई जा सकीं।
किसानों ने मौजूदा हालात की तुलना 1972 के भीषण सूखे से की है। उनका कहना है कि 1972 में अनाज की भारी किल्लत जरूर थी, लेकिन कुछ विहिरों में पीने लायक पानी तब भी बचा हुआ था। इस बार तो विहिरें तल तक सूख गई हैं, इसलिए पानी की समस्या पहले से कहीं ज्यादा गंभीर हो गई है, ऐसा ग्रामीणों का कहना है।
लंबे समय तक पर्याप्त बारिश न होने से खरीफ सीजन की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। किसानों ने जो जुताई-बुवाई, बीज, खाद और बाकी खर्च किए थे, वे सब बेकार चले गए, जिससे आर्थिक संकट और गहरा गया है। हाथ में फसल न होने की स्थिति में अगले सीजन के लिए पैसा कहां से लाएं, यह सवाल अब किसानों के सामने खड़ा है।
फसलों के बाद अब किसानों के सामने अपने पशुधन को बचाने की बड़ी चुनौती है। पानी तो उपलब्ध नहीं ही है, ऊपर से हरा और सूखा चारा मिलना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में जानवरों को कैसे जिंदा रखा जाए, यह चिंता किसानों को सता रही है।
अगर हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ और पानी-चारे का इंतजाम नहीं हुआ, तो जहां पानी और चारा उपलब्ध है वहां जानवरों समेत पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा, ऐसा किसानों ने कहा है। चापडगांव की यह हकीकत सूखे की गंभीरता को उजागर करती है। यहां पीने का पानी, जानवरों के लिए चारा और नुकसान झेल रहे किसानों को मदद देने की मांग उठ रही है।
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