मराठवाड़ा में दुष्काल: धीरज देशमुख ने फडणवीस से SDRF मदद और पंचनामे तेज करने की मांग की
पूर्व विधायक धीरज देशमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को निवेदन देकर मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित किसानों के लिए तुरंत मदद मांगी।
मराठवाड़ा समेत महाराष्ट्र के कई इलाकों में इस बार बारिश कम और बेतरतीब रही, बीच में लंबा गैप भी आया। इसका असर मिट्टी की नमी और भूजल स्तर पर भी पड़ा है, और नतीजा यह हुआ कि इलाके में गंभीर सूखे जैसे हालात बन गए हैं। सोयाबीन, गन्ना, कपास, तूर, मूंग, उड़द, मक्का और बाजरा जैसी सारी खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसान बड़ी आर्थिक मुसीबत में फंस गया है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता और पूर्व विधायक धीरज विलासराव देशमुख ने सरकार से मांग की है कि मराठवाड़ा की असली स्थिति का ठीक से आकलन करके प्रभावित तालुका और गांवों को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। साथ ही किसानों को तुरंत आर्थिक मदद, फसल बीमा का लाभ और खास पैकेज दिया जाए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस आज मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके का दौरा करने आए, तब धीरज देशमुख ने उन्हें किसानों की मांगों वाला निवेदन सौंपा। निवेदन में उन्होंने कहा कि सरकार को MahaMADAT, MahaRain, बारिश के आंकड़े, मिट्टी की नमी, भूजल स्तर, पानी का भंडार और असल फसल नुकसान के आधार पर गांव-गांव और खेत-खेत का सही सूखा आकलन करना चाहिए। जो तालुका और गांव जरूरी शर्तें पूरी करते हैं, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। प्रभावित किसानों के गांव और खेत के हिसाब से पंचनामे युद्ध स्तर पर पूरे करके SDRF के तहत मदद तुरंत बांटी जाए, और NDRF के तहत विशेष मदद के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाए। आपदा प्रभावित किसानों को सीधे अनुदान मंजूर करके पारदर्शी और आसान तरीके से लाभ दिया जाए। कृषि कर्ज की वसूली रोकने, कर्ज का पुनर्गठन करने और नया फसल कर्ज देने के बारे में सभी राष्ट्रीयकृत, सहकारी और दूसरी वित्तीय संस्थाओं को जरूरी निर्देश दिए जाएं।
निवेदन में यह भी कहा गया कि पानी की संभावित किल्लत और पशुओं की सुरक्षा के लिए टैंकर से पानी सप्लाई, वैकल्पिक पानी व्यवस्था, चारा छावनी, चारा डिपो और जरूरी पशु चिकित्सा सुविधाओं की पहले से तैयारी करने के निर्देश प्रशासन को दिए जाएं। मराठवाड़ा के लिए खास सूखा राहत पैकेज और "मराठवाड़ा रबी पुनर्बांधणी विशेष योजना" को मंजूरी देने का प्रस्ताव सरकार के पास तुरंत भेजा जाए, ताकि प्रभावित किसानों को रबी सीजन के लिए बीज, खाद, सूक्ष्म सिंचाई और तकनीकी मदद मिल सके।
देशमुख ने यह भी मांग की कि साल 2023-24 में 72 घंटे वाली शर्त के कारण जो फसल बीमा दावे खारिज या लंबित पड़े हैं, उन्हें दोबारा विचार के लिए खोला जाए। पात्रता तय करने के लिए राजस्व विभाग के पंचनामे, कृषि विभाग की रिपोर्ट, बारिश के रिकॉर्ड, WINDS की जानकारी, मौसम रिपोर्ट और दूसरे सरकारी दस्तावेजों का आधार लिया जाए। नुकसान वाले इलाकों को PMFBY के तहत "Wide-spread Localized Calamity" माना जाए। जिन किसानों ने बैंक, कृषि विभाग, राजस्व विभाग या किसी और अधिकृत जरिए से नुकसान की जानकारी दी है, उनके दावे स्वीकार किए जाएं। हाई कोर्ट ने PIL No. 91/2021 में जो सिद्धांत तय किए हैं, वे मराठवाड़ा के मामलों में भी लागू किए जाएं।
उन्होंने कहा कि 72 घंटे के बाद मंजूर हुए दावों की भी जांच करके एक जैसी हालत में सभी किसानों को बराबर न्याय दिया जाए। धीरज विलासराव देशमुख ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से कहा, "असल नुकसान होने के बावजूद सिर्फ तकनीकी वजह से किसानों को फसल बीमे के हक से वंचित न रखा जाए। सभी पात्र किसानों को तय समय सीमा में उनका फसल बीमा लाभ मिलना चाहिए।" इस दौरान उनके साथ लातूर ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अभय सालुंके और कांग्रेस के दूसरे पदाधिकारी भी मौजूद थे।
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