मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

बुलढाणा में सूखे के मुआयने के बाद हर्षवर्धन सपकाळ का सरकार पर हमला, तुरंत मदद की मांग

काँग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने बुलढाणा जिले में किसानों के खेतों पर जाकर फसलों की हालत देखी और राज्य सरकार पर बड़ा आरोप लगाया।

बुलढाणा में सूखे के मुआयने के बाद हर्षवर्धन सपकाळ का सरकार पर हमला, तुरंत मदद की मांग
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र में बारिश ने बड़ा गैप दे दिया है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बुलढाणा जिले में भी कई जगहों पर फसलों की हालत बहुत खराब हो गई है, ऐसा दावा काँग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ ने किया है। वे खुद किसानों के खेतों के बांध तक पहुंचे और वहां जाकर हालात का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने सरकार पर सीधा निशाना साधा।

सपकाळ के मुताबिक पिछले 40 से 45 दिन से बारिश गायब है, जिसकी वजह से फसलें सूख गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान जब संकट में है, तब सरकार बैठकों और चर्चाओं में वक्त निकाल रही है। उन्होंने सवाल उठाया, "किसानों को मदद देने के लिए सरकार किस मुहूर्त का इंतजार कर रही है?"

सपकाळ ने बताया कि बुलढाणा जिले के एक युवा किसान ने 20 एकर सोयाबीन की फसल तबाह कर देने का फैसला ले लिया है। इस किसान ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों से गुजारिश की थी कि वे खुद आकर खेत की हालत देखें, मगर उनके पास कोई नहीं फटका, ऐसा सपकाळ का दावा है।

कृषिमंत्री बुलढाणा जिले के दौरे पर थे, तब भी उन्होंने इस किसान से मुलाकात नहीं की, यह बताते हुए सपकाळ ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, "किसान सरकार को अपना माई-बाप मानकर आशा से देखता है, मगर सरकार को उनकी कोई परवाह नहीं है।"

किसानों को तुरंत राहत मिले, इसके लिए सपकाळ ने कुछ ठोस मांगें रखी हैं। उनकी मांग है कि हेक्टर के हिसाब से 1 लाख रुपये आर्थिक मदद दी जाए, किसानों के बच्चों की स्कूल-कॉलेज फीस माफ हो और सरसकट कर्जमाफी लागू की जाए।

इसी बीच सपकाळ ने बताया कि काँग्रेस पार्टी की तरफ से किसानों के इस मसले पर सत्याग्रह और गांव-गांव में आंदोलन चलाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने तुरंत मदद का ऐलान नहीं किया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

इसके साथ ही सपकाळ ने किसानों से हिम्मत न हारने की अपील भी की। उन्होंने कहा, "आत्महत्या जैसा आखिरी कदम मत उठाइए," और कहा कि इस मुश्किल वक्त में किसान धैर्य रखें। अब सपकाळ की इन मांगों पर राज्य सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर किसानों और सियासी हलकों की नजर टिकी है।

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