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17:46 IST

मनोज जरांगे बोले, जेल जाना पड़े तो झुकेंगे नहीं, शिंदे पर भी निशाना साधा

मराठा आरक्षण आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने पत्रकार परिषद में मोडी और फारसी लिपि के पुराने कुणबी दस्तावेज़ ढूंढने की मुहिम का एलान किया, साथ ही आंदोलकों की जांच को लेकर एकनाथ शिंदे पर सवाल उठाए।

मनोज जरांगे बोले, जेल जाना पड़े तो झुकेंगे नहीं, शिंदे पर भी निशाना साधा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मराठा आरक्षण आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने सोमवार, 22 सितंबर को पत्रकार परिषद बुलाकर बताया कि राज्य सरकार ने पुराने कुणबी रिकॉर्ड ढूंढने के काम को रफ्तार देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। जरांगे के मुताबिक सरकार ने मोडी और फारसी लिपि के पुराने रिकॉर्ड ढूंढने के लिए इन लिपियों के जानकार और पढ़ने वालों को खास अधिकार देने का शासन निर्णय जारी किया है। इसी के जरिए पुराने दस्तावेजों में दर्ज रिकॉर्ड खोजने का काम किया जाएगा।

जरांगे ने राज्य भर के मोडी और फारसी लिपि पढ़ने वालों से इस मुहिम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने बताया कि 23 से 27 सितंबर के बीच छत्रपती संभाजीनगर के गैलेक्सी अस्पताल में इच्छुक लोग अपना नाम दर्ज करा सकते हैं। जिन लोगों का रजिस्ट्रेशन होगा, उनके नाम पुराने रिकॉर्ड ढूंढने वाली कमेटी के लिए सरकार को आधिकारिक तौर पर भेजे जाएंगे, ऐसा उन्होंने कहा। जरांगे ने कहा कि जिन लोगों को मोडी या फारसी लिपि पढ़ना आता है या जिन्हें वंशावली जोड़ने का ज्ञान है, वे समाज की भलाई के लिए इस काम में योगदान दें। उन्होंने बताया कि सातारा, कोल्हापुर, त्र्यंबकेश्वर के अलावा पुरानी बाजारों, जेलों से जुड़े रिकॉर्ड और दूसरी जगहों पर भी सबूत ढूंढने की जरूरत है। पुणे और दिल्ली के रिकॉर्ड में भी खोज की जा सके, इस पर विचार किया जाएगा, ऐसा उन्होंने कहा।

जरांगे ने कहा कि पुराने रिकॉर्ड ढूंढने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर अफसरों ने रिकॉर्ड ढूंढने का काम ठीक से नहीं किया। उनके मुताबिक मराठवाड़ा के हर तालुका में मोडी और फारसी लिपि जानने वाले जानकार उपलब्ध कराकर इस काम को तेज करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शिंदे कमेटी को लेकर अविश्वास जताने की जरूरत नहीं है, लेकिन सरकार के पास पर्याप्त मनुष्यबल न होने की वजह से समाज के लिपि जानकारों को खुद आगे आना जरूरी है।

पत्रकार परिषद में जरांगे ने अपने साथियों की कथित जांच के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आरोपों की जांच होने दी जाए, वे इसका सामना करने को तैयार हैं। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि मराठा आंदोलन को पैसे या किसी और तरह से मदद करने वालों को निशाना बनाया जा रहा है। जरांगे ने सवाल किया कि अगर आंदोलकों की जांच की जा रही है, तो क्या गरीब आंदोलकों की मदद अमीर मराठा लोग न करें। इसी मुद्दे पर उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी निशाना साधा। जरांगे का आरोप है कि मराठा आंदोलकों को टारगेट किया जा रहा है, और उन्होंने 2029 के चुनाव का जिक्र करते हुए राजनीतिक जवाब देने की भाषा भी बोली।

जरांगे ने साफ कहा कि अगर उन्हें या आंदोलन में साथ देने वाले साथियों को जांच का सामना करना पड़े, तो भी आंदोलन का रुख नहीं बदलेगा। उन्होंने कहा, जेल में जाना पड़े तो चलेगा, लेकिन झुकेंगे नहीं। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन में मदद करने वाले कुछ लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। बारस्कर के वीडियो से जुड़े सवाल पर बोलते हुए जरांगे ने अमीर, गरीब और राजनीतिक मराठों के बीच के रिश्तों पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि आरक्षण मिले या न मिले, उनका रुख नहीं बदलेगा।

राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में हुई चर्चा को लेकर भी जरांगे ने सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि कैबिनेट में मराठा आंदोलन और आंदोलकों को लेकर चर्चा हुई, और इसी आधार पर शिंदे पर आलोचना की। उन्होंने आंदोलन की इजाजत, आंदोलकों की जांच और सरकार की कथित भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए।

बता दें कि जरांगे ने 17 सितंबर को 20 दिन से चल रहा उपोषण स्थगित किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि सरकार को मराठा आरक्षण से जुड़ी मांगों पर काम करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया गया है, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। अब मोडी और फारसी लिपि के रिकॉर्ड ढूंढने के काम में समाज के जानकारों को शामिल करने की अपील करते हुए जरांगे ने पुराने कुणबी रिकॉर्ड ढूंढने पर अपना ध्यान केंद्रित किया है।

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