फडणवीस कैबिनेट का फैसला: साखर कारखानों को सॉफ्ट लोन, योजनाओं की जांच के लिए महा-टैक सेल बनेगा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सात अहम फैसले लिए गए।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में गन्ना उत्पादक किसानों, चीनी मिलों और आम नागरिकों से जुड़े सात बड़े फैसले लिए गए। इनमें सबसे अहम है सहकारी चीनी मिलों को सॉफ्ट लोन देने का फैसला, ताकि 2025-26 के सीजन की बकाया एफआरपी (FRP) किसानों तक पहुंच सके।
सरकार यह सॉफ्ट लोन सहकारी चीनी मिलों को आर्थिक मदद देने के लिए देगी। यह रकम 2025-26 के पेराई सीजन की बकाया एफआरपी चुकाने के साथ-साथ आने वाले 2026-27 के सीजन की तैयारी सुचारू रूप से पूरी करने में भी काम आएगी।
2025-26 के सीजन में राज्य की 210 चीनी मिलों ने कुल 1,045.63 लाख मेट्रिक टन गन्ने की पेराई की थी। इस गन्ने के बदले किसानों को कुल 40,446 करोड़ रुपये एफआरपी के तौर पर देना तय था। 15 जून तक इसमें से 40,050 करोड़ रुपये यानी 99.02 प्रतिशत रकम किसानों को दी जा चुकी थी। 30 जून तक यह रकम बढ़कर 40,148 करोड़ रुपये हो गई, यानी कुल 99.26 प्रतिशत एफआरपी किसानों को मिल चुकी है।
कैबिनेट ने दूसरा बड़ा फैसला यह लिया कि हर साल सरकारी योजनाओं पर भारी भरकम पैसा खर्च होता है, लेकिन इन योजनाओं का फायदा नागरिकों तक असल में कितना पहुंचता है, इसकी जांच अब तक ठीक से नहीं हो पाती थी। इसी को परखने के लिए 'महाराष्ट्र तांत्रिक सहाय्यता कक्ष' यानी 'महा-टैक' शुरू करने को मंजूरी दी गई है। यह काम इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, मुंबई और 'सेंटर फॉर रिसर्च इन स्कीम्स एंड पॉलिसीज' के सहयोग से किया जाएगा। इसके तहत सरकार की 25 बड़ी योजनाओं और 25 अहम नीतियों का अध्ययन होगा। खास बात यह है कि इसमें सिर्फ सरकारी कागजात नहीं देखे जाएंगे, बल्कि जिन लोगों को इन योजनाओं का सीधा फायदा मिला है, उनसे बातचीत करके भी जानकारी जुटाई जाएगी।
बैठक में कुछ और फैसले भी लिए गए। महाराष्ट्र साहित्य परिषद की नाशिक शाखा को अध्ययन कक्ष और पुस्तकालय के लिए पट्टा करारनामे की रजिस्ट्री पर स्टांप ड्यूटी से छूट दी गई है, यह फैसला नाशिक महानगरपालिका की इमारत के लिए लागू होगा।
वर्धा जिले की आर्थी नगरपरिषद को व्यापारी संकुल बनाने के लिए 6,240.30 चौरस मीटर सरकारी जमीन मुफ्त में देने को भी मंजूरी दी गई है।
इसके अलावा महाराष्ट्र नगरपरिषद, नगरपंचायत और औद्योगिक नगरी अधिनियम, 1965 में भी संशोधन किया जाएगा।