मराठवाड़ा में कम बारिश से फसलें बर्बाद, केंद्र को मदद का प्रस्ताव 5 अक्टूबर तक संभव
कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे के दौरे के बाद राज्य सरकार मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखे जैसे हालात का जायजा ले रही है, जबकि विपक्ष ने तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की है।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश का बड़ा गैप पड़ने से खरीफ सीजन की फसलों पर संकट खड़ा हो गया है। खासकर मराठवाड़ा और विदर्भ के किसान बारिश के इंतजार में परेशान हैं। सोयाबीन, कपास, मक्का, तूर, मूंग और बाजरा जैसी फसलों पर बारिश न होने का असर दिखने लगा है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार सूखे जैसी स्थिति का प्रारंभिक जायजा ले रही है।
अभी तक राज्य के किसी भी जिले या तालुका में आधिकारिक तौर पर सूखा घोषित नहीं किया गया है। लेकिन बारिश में आए गैप, फसलों की हालत, पानी की उपलब्धता और चारे की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे मराठवाड़ा समेत कई इलाकों का दौरा कर चुके हैं। उनके निरीक्षण के साथ-साथ कृषि विभाग और मदद व पुनर्वसन विभाग के शुरुआती आंकड़ों को मिलाकर केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव का ढांचा तैयार किया जाएगा। भरणे ने कहा है कि 30 सितंबर के बाद स्थिति का जायजा लेकर 5 अक्टूबर तक फैसला होने की संभावना है, यानी अगले कुछ दिन किसानों के लिए काफी अहम रहने वाले हैं।
मराठवाड़ा के सभी आठ जिलों में बारिश के गैप का असर खरीफ फसलों पर पड़ा बताया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इलाके की खड़ी फसलों में से करीब 25 फीसदी फसल का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। सोयाबीन को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि कपास, मक्का और तूर की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है, ऐसा कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा है। नांदेड में कृषिमंत्री भरणे की मौजूदगी में हुई बैठक में फसलों की स्थिति, पानी की उपलब्धता, चारे और पशुधन से जुड़ी दिक्कतों का जायजा लिया गया। नुकसान झेल रहे किसानों को मदद मिले, इसके लिए फसल कटाई प्रयोग सही और पारदर्शी तरीके से करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
राज्य में इस वक्त ई-पंचनामे की प्रक्रिया चल रही है, और 5 अक्टूबर तक फाइनल आंकड़े मिलने की उम्मीद है। इससे पहले की प्रारंभिक रिपोर्ट में बारिश की कमी और फसलों पर पड़े असर को दर्ज किया जाएगा। केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में NDRF के नियमों के मुताबिक मदद, फसल बीमा कंपनियों से 25 फीसदी एडवांस रकम, चारा छावनी, टैंकर और मनरेगा के कामों में तेजी जैसे उपायों को शामिल किए जाने की संभावना है। इसके अलावा छात्रों के लिए स्कूल-कॉलेज फीस माफी और हॉस्टल अनुदान का मुद्दा भी प्रस्ताव में शामिल होने की बात कही जा रही है।
मराठवाड़ा के अलावा नाशिक जिले के नांदगांव तालुका समेत कई इलाकों में भी बारिश के लंबे गैप से किसान परेशान हैं। कुछ किसानों का कहना है कि मक्का, बाजरा, सोयाबीन, मूंग, मठ और कपास जैसी फसलें दाना भरने की अवस्था में ही सूख गईं। किसानों के मुताबिक अब तेज बारिश भी हो जाए तो कुछ फसलों से उम्मीद के मुताबिक पैदावार मिलना मुश्किल है। जानवरों के लिए अभी जितना चारा उपलब्ध है वह कुछ समय तक चल जाएगा, लेकिन बारिश का गैप बना रहा तो चारे और पानी की किल्लत का खतरा भी है।
मराठवाड़ा की मौजूदा हालत की तुलना कुछ जगहों पर 1972 के सूखे से की जा रही है। हालांकि आज की खेती और उस दौर की स्थिति में बड़ा फर्क है, क्योंकि अभी बीज, खाद, कीटनाशक, जुताई और स्प्रे का खर्च बढ़ गया है। ऐसे में फसल बर्बाद होने पर किसानों पर आर्थिक बोझ और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।
इस बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस शरदचंद्र पवार पार्टी के नेता जयंत पाटील ने महाराष्ट्र में जल्द से जल्द सूखा घोषित करने की मांग की है। उन्होंने कर्नाटक में सूखे की घोषणा का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार को भी फैसला लेना चाहिए। बताया जा रहा है कि शरद पवार ने 18 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चिट्ठी लिखकर सूखे जैसे हालात वाले तालुकों को रियायत, किसानों को आर्थिक मदद, कर्जमाफी, फसल बीमा, रोजगार हमी के काम, टैंकर, चारा छावनी और पशुधन के लिए पानी जैसे उपायों की मांग की।
अब कृषिमंत्री दत्तात्रय भरणे की दौरे की रिपोर्ट, कृषि विभाग के आंकड़े और मदद व पुनर्वसन विभाग के शुरुआती अनुमान को मिलाकर आगे का ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार को मदद का प्रस्ताव भेजा जा सकता है। इसलिए 5 अक्टूबर तक सूखे जैसी स्थिति पर सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर राज्य के किसानों की नजर टिकी हुई है।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।