महाराष्ट्र में सूखे का पंचनामा आज से शुरू, मंत्री खुद खेतों में जाएंगे, शनिवार से पहले पहली अधिसूचना
राज्य के कई हिस्सों में बारिश की बड़ी कमी से खरीफ फसलों पर संकट गहराया, सरकार ने पंचनामे तेज करने और मंत्रियों को सीधे खेतों में भेजने का फैसला किया
महाराष्ट्र के कई इलाकों में बारिश ने इस बार बड़ी ओढ दे दी है, जिससे खरीफ सीजन की फसलों पर संकट गहरा गया है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने सूखे जैसी हालात की सीधी पड़ताल और फसल नुकसान के पंचनामे तेजी से करवाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री और मंत्री आज से अलग-अलग जिलों के दौरे पर निकल रहे हैं और किसानों के खेतों तक जाकर हालात का जायजा लेंगे।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान किया है कि सूखे को लेकर पहली अधिसूचना शनिवार से पहले जारी की जाएगी। अभी तक जो जानकारी मिली है, उसके आधार पर जिन इलाकों में सूखे जैसी हालात बनी है, उन्हें इस अधिसूचना में शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आगे नई जानकारी आते ही बाकी इलाकों को भी इसमें जोड़ा जा सकेगा।
राज्य में सूखे जैसी हालात को देखते हुए फसल नुकसान के पंचनामे बुधवार से शुरू किए जा रहे हैं। जमीनी स्तर से मिल रही रिपोर्ट के आधार पर असली हालात की पुष्टि की जाएगी। अब तक मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक कई इलाकों में बारिश का बड़ा गैप आया है और फसलें सूख गई हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि खासकर सोयाबीन, मक्का, कपास, ज्वार और धान की फसलों पर बड़ा असर पड़ा है। पंचनामों के जरिए सरकार को यह पता चलेगा कि असल में कितना नुकसान हुआ है, कौन से इलाके ज्यादा प्रभावित हैं और किसानों को किस तरह की मदद चाहिए।
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री फडणवीस ने साफ किया कि सूखे की पहली अधिसूचना शनिवार से पहले निकाली जाएगी और इसमें अभी तक सरकार के पास आई जानकारी के आधार पर सूखा प्रभावित इलाकों को शामिल किया जाएगा। यह प्रक्रिया यहीं नहीं रुकेगी, आगे जिन-जिन इलाकों से सूखे की जानकारी सामने आएगी, उन्हें अधिसूचना में जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक जमीनी स्तर से आई रिपोर्ट देखने पर राज्य के ज्यादातर हिस्सों में सूखे जैसी हालात दिख रही है और बारिश के गैप से कई जगह फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है।
सूखे की हालात से निपटने के लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार को आर्थिक मदद का प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रही है, लेकिन फडणवीस ने साफ कहा कि केंद्र की मदद मिलने तक राज्य सरकार हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठेगी। पहले भी सूखे या ज्यादा बारिश जैसी हालात में राज्य सरकार ने केंद्र की मदद का इंतजार किए बिना किसानों को सहायता दी है, इस बार भी उसी तरह तुरंत कदम उठाए जाएंगे। आगे के 7 से 8 महीने अहम होने के चलते पीने के पानी की प्लानिंग करने के निर्देश भी सभी संबंधित विभागों को दिए गए हैं, यानी सरकार के सामने सिर्फ फसल नुकसान नहीं बल्कि आने वाले वक्त में पानी की किल्लत का सवाल भी है।
मुख्यमंत्री फडणवीस आज लातूर जिले में 2 जगहों का दौरा करने के बाद धाराशिव जिले के कळंब तालुका के एरमाळा और तुळजापूर पहुंचकर हालात देखेंगे, फिर सोलापुर जिले की 3 जगहों पर भी जाएंगे। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अमरावती, अकोला और बुलढाणा जिलों में सूखे की हालात का जायजा लेंगे। शिंदे ने अपने सभी मंत्रियों को निर्देश दिया है कि हर मंत्री खुद खेतों में जाकर पंचनामे करवाए और गांव-गांव जनता दरबार लगाए।
अमरावती जिले के वरूड और मोर्शी तालुका की सूखे की हालात पर भी सरकार का ध्यान गया है। मोर्शी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक देवेंद्र भुयार ने मुंबई में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से मुलाकात कर वरूड-मोर्शी तालुका में सूखे, किसानों और नागरिकों की परेशानियों तथा पानी की किल्लत की पूरी जानकारी दी, जिसके बाद सुनेत्रा पवार ने अमरावती के जिलाधिकारी से बात कर वहां की स्थिति की जानकारी ली।
सूखे पर तेजी से फैसले लेने के लिए राज्य सरकार ने कैबिनेट सब-कमेटी बनाई है। मुख्यमंत्री फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किसानों और सूखे से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के बाद राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे की अध्यक्षता में सूखा निवारण कैबिनेट सब-कमेटी बनाने का फैसला लिया गया। इस कमेटी में मंत्री गिरीश महाजन, गुलाबराव पाटील, पंकजा मुंडे, दत्तात्रय भरणे, जयकुमार गोरे, संजय राठोड, प्रताप सरनाईक, बाबासाहेब पाटील और मकरंद जाधव-पाटील को सदस्य बनाया गया है, जबकि मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल कमेटी के सदस्य सचिव होंगे। इस कमेटी को कैबिनेट जितने ही अधिकार दिए गए हैं, ताकि किस इलाके में सूखा है, वहां क्या उपाय करने हैं और किसानों को किस तरह की मदद देनी है, इसका फैसला जल्दी लिया जा सके।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने मंत्रियों और विधायकों को भी किसानों के खेतों में जाकर फसलों का मुआयना करने को कहा है। इस बीच कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को राज्य के सभी राजस्व विभागों में सूखे को लेकर समीक्षा बैठकें करने की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन विधानपरिषद की 5 सीटों के लिए चुनाव का ऐलान होने से आचार संहिता का असर इन बैठकों पर पड़ सकता है। बुधवार को पुणे में होने वाली तय समीक्षा बैठक इसी वजह से अधर में है, और कृषि विभाग को इसके लिए केंद्रीय चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।
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