रविवार, 1 नवंबर 2026

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मराठा आरक्षण: जरांगे पाटील की मुंबई कूच की घोषणा, सरकार को दी आठ दिन की मोहलत

मराठा आरक्षण: जरांगे पाटील की मुंबई कूच की घोषणा, सरकार को दी आठ दिन की मोहलत तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

उपोषण के सोलहवें दिन जरांगे पाटील का सरकार पर हमला, सहयोगियों की जांच पर उठाए सवाल

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर उपोषण पर बैठे मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने सोलहवें दिन सरकार के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोला। उन्होंने साफ कहा कि मुंबई जाकर जान दे देंगे, लेकिन सरकार के सामने घुटने नहीं टेकेंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपनी पुरानी घोषणा दोहराई कि 15 सितंबर को अंतरवाली सराटी से मुंबई के लिए निकलेंगे और 19 सितंबर से आझाद मैदान पर उपोषण शुरू करेंगे।

जरांगे ने इस दौरान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे पर सीधा आरोप लगाया। इसके अलावा एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के बीच में ही उनके करीबी सहयोगियों की जांच शुरू कर दी गई है, और सवाल उठाया कि ऐसा क्यों किया जा रहा है। उन्होंने राजस्व विभाग के अफसरों पर भी निशाना साधा और कहा कि शनिवार-रविवार की छुट्टी के दिन भी अफसर काम कर रहे हैं, यह सब राजनीतिक दबाव में हो रहा है।

जरांगे ने सरकार से मांग की है कि हैदराबाद गॅझेट, सातारा और कोल्हापूर गॅझेट, कुणबी सेट, कण्या प्रमाणपत्र से जुड़े मसले के साथ-साथ एमपीएससी, ईडब्ल्यूएस और एसबीसी छात्रों की मांगें भी मान ली जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब भी आठ दिन का वक्त है। यह बात उन्होंने खुद मराठा नेता के तौर पर कही।

जांच को लेकर पूछे गए सवाल पर जरांगे ने कहा कि वे किसी जांच से डरकर सरेंडर नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि आंदोलन की जगह पर ही जान दे देंगे, लेकिन सरकार के सामने झुकेंगे नहीं। उन्होंने शिंदे-फडणवीस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि मुंबई में आंदोलन के दौरान उन पर गोली चलाने की साजिश रची जा रही है, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया। यह बात कहते हुए वे भावुक हो गए और मराठा समाज से अपील की कि उन्हें कुछ भी हो जाए, मराठा लोग एकजुट रहें।

आझाद मैदान पर उपोषण की इजाजत न मिलने के मुद्दे पर भी जरांगे आक्रामक दिखे। उन्होंने कहा कि द्वेष की भावना से यह परमिशन नकारी गई है, और आंदोलन संविधान के दायरे में रहकर ही किया जाएगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार पानी और इलाज बंद करने पर मजबूर करती है, तो वे इलाज लेने से भी इनकार कर देंगे।

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