मनोज जरांगे का मुंबई में उपोषण की परमिशन के लिए तीसरी बार आवेदन, पुलिस की सभी 20 शर्तें मंजूर
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अंतरवाली सराटी में आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई पुलिस से आझाद मैदान में उपोषण की परमिशन तीसरी बार मांगी है, इस बार पुलिस की सारी शर्तें मानते हुए।
मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का आंदोलन अंतरवाली सराटी में जारी है, और आज उनके उपोषण का 17वां दिन है। इस बीच जरांगे पाटील मुंबई के आझाद मैदान में भी उपोषण करने के अपने फैसले पर टिके हुए हैं। लेकिन मुंबई पुलिस ने अभी तक उन्हें इसकी परमिशन नहीं दी है।
पुलिस पहले भी दो बार जरांगे पाटील की परमिशन की अर्जी ठुकरा चुकी है। इसके बाद जरांगे पाटील की तरफ से तीसरी बार परमिशन के लिए अर्जी लगाई गई है। इस नई अर्जी में उन्होंने वो सारी शर्तें मानने की तैयारी दिखाई है, जिन कारणों से पहले पुलिस ने परमिशन देने से इनकार किया था।
अर्जी में कहा गया है कि मराठा समाज की लंबित मांगों की तरफ सरकार का ध्यान खींचने के लिए आझाद मैदान में शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन किया जाएगा। यह भी साफ किया गया है कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहेगा, ताकि कानून और व्यवस्था की कोई दिक्कत न आए। इसका पूरा ध्यान आयोजकों की तरफ से रखा जाएगा।
जरांगे पाटील की तरफ से इस अर्जी में कुल 20 शर्तें मंजूर की गई हैं। आंदोलन के दौरान लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति खराब न हो, इसका पूरा भरोसा आयोजकों ने दिया है। अर्जी की एक अहम शर्त के मुताबिक, अगर ड्यूटी पर मौजूद कोई भी पुलिस अफसर मांगे, तो आंदोलन की परमिशन दिखाने के लिए उसकी ओरिजिनल कॉपी साथ रखी जाएगी। साथ ही अर्जी में बताई गई आंदोलनकारियों की तय संख्या की लिमिट भी बनाए रखी जाएगी।
आंदोलन में शामिल होने वाला कोई भी शख्स भड़काऊ भाषण या भीड़ को उत्तेजित करने वाली बातें नहीं करेगा, इसका भी भरोसा दिया गया है। इसके अलावा अर्जी में यह भी लिखा गया है कि आंदोलन की जगह पर किसी भी तरह की गाड़ी नहीं लाई जाएगी। इसमें ट्रैक्टर, ठेला (ट्रॉली), बैलगाड़ी, साइकिल रिक्शा और हाथगाड़ी जैसी गाड़ियां शामिल हैं।
खास बात यह है कि आंदोलन की जगह पर कोई जानवर भी नहीं लाया जाएगा। पक्षी, घोड़े, हाथी, ऊंट, मुर्गे जैसे जानवरों को आंदोलनस्थल पर नहीं लाया जाएगा, यह भी जरांगे पाटील की अर्जी में साफ किया गया है। अर्जी में कहा गया है कि मराठा समाज की जायज और लंबित मांगों की तरफ सरकार का ध्यान खींचने के लिए यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहते हुए किया जाएगा।
अब पुलिस ने पहले जो एतराज उठाए थे, उन सभी शर्तों को मानते हुए तीसरी बार अर्जी दी गई है। इसलिए इस बार मुंबई पुलिस क्या फैसला लेती है, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।