मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

सांगली में सूखे के आसार, 54 महसूल मंडलों में 21 दिन से ज्यादा बारिश नहीं

सांगली जिले में बारिश के लंबे ब्रेक से पानी की किल्लत बढ़ी, प्रशासन ने झीलों और नदियों से पानी उठाने पर रोक लगाई।

सांगली में सूखे के आसार, 54 महसूल मंडलों में 21 दिन से ज्यादा बारिश नहीं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

बारिश का सीजन खत्म होने के करीब है और सांगली जिले पर पानी की किल्लत और सूखे का साया गहरा गया है। जिलाधिकारी मैनक घोष ने बताया कि इस साल 1 जून से 15 सितंबर के बीच जिले में औसतन सिर्फ 80 फीसदी बारिश हुई है। जिले के 69 महसूल मंडलों में से 54 मंडलों में 21 दिन से ज्यादा समय तक बारिश का गैप रहा, और यही आंकड़ा सूखे का मानदंड पूरा कर देता है, इसलिए अभी जिले में सूखे जैसी हालत बन गई है।

खास बात यह है कि जून जुलाई में जिले में औसत से 113 फीसदी बारिश हुई थी, इसलिए इस दौरान 50 फीसदी से कम बारिश वाला मानदंड यहां लागू नहीं होता। लेकिन उसके बाद बारिश का जो लंबा ब्रेक आया, उसने हालत गंभीर बना दी। 8 जून से 30 सितंबर तक के पूरे बारिश के आंकड़ों, फसलों की हालत और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर सूखे की अंतिम स्थिति तय की जाएगी।

इसी बीच जिले में पानी की उपलब्धता पर बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रशासन ने सभी झीलों से पानी उठाने पर रोक लगा दी है। सोमवार, 21 सितंबर से कृष्णा और वारणा नदी पर भी पानी उठाने पर पाबंदी लागू की जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि पीने का पानी बचाना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है, इसलिए सिंचाई के लिए बिना इजाजत पानी उठाने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। कोयना डैम से फिलहाल कृष्णा नदी में 1 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जबकि प्रशासन के मुताबिक जिले की जरूरत के हिसाब से यह कम है। जरूरत करीब 2,500 क्यूसेक की है, पर मिल रहा है सिर्फ 1 हजार क्यूसेक। जो पानी मिल रहा है, उसमें से ज्यादातर तेंभू उपसा सिंचन योजना की तरफ भेजा जा रहा है, जिससे सांगोला, खानापुर और कवठेमहांकाळ इलाके में पानी सप्लाई बनी रहे। इससे कृष्णा नदी का पानी लेवल गिर रहा है और नदी पर बनी दूसरी सिंचाई योजनाओं पर भी असर पड़ा है। कोयना से 2500 क्यूसेक के बजाय सिर्फ 1 हजार क्यूसेक ही मिलने से ताकारी उपसा सिंचन योजना पूरी तरह बंद है, जबकि म्हैसाळ योजना से जितना पानी मिल रहा है उसी हिसाब से कुछ इलाकों को पानी देने की कोशिश की जा रही है।

सांगली प्रशासन ने सूखे और पानी की किल्लत को देखते हुए सरकार से मांग की है कि वारणा डैम से 15 अक्टूबर तक 600 क्यूसेक पानी छोड़ा जाए। अगर यह पानी मिल जाता है तो जत, कवठेमहांकाळ और मिरज तालुका के पानी की किल्लत वाले इलाकों को राहत देने की कोशिश की जाएगी। खासकर जत और कवठेमहांकाळ के पूर्वी हिस्से में बारिश कम होने से पीने के पानी की समस्या दिन ब दिन गंभीर हो रही है।

सूखे के मानदंडों में 21 दिन से ज्यादा बारिश का गैप एक अहम फैक्टर है। जिले के 69 महसूल मंडलों में से 54 मंडलों में यह मानदंड पूरा हो गया है, जिनमें जत तालुका के करीब 75 फीसदी महसूल मंडल शामिल हैं। इससे जत तालुका में किल्लत जैसी हालत बन गई है। जहां मांग आई है वहां टैंकर शुरू कर दिए गए हैं। कुछ झीलों का पानी लेवल 25 फीसदी से भी नीचे चला गया है, और दोड्डानाला झील का पानी स्टॉक मृत संचय के करीब पहुंच गया है। वारणा डैम से पानी मिलने पर दोड्डानाला झील भरने की कोशिश की जाएगी।

पानी की किल्लत के चलते जिले में अभी 23 टैंकर चल रहे हैं, जिनमें 21 प्राइवेट और 2 सरकारी टैंकर हैं। इन टैंकरों से 26 गांव और 160 वाड़ियों के 43 हजार 687 गांव वालों को पानी सप्लाई किया जा रहा है। किल्लत बढ़ने पर टैंकरों की संख्या और बढ़ाने की तैयारी प्रशासन ने रखी है। जिलाधिकारी ने कहा है कि जिन नागरिकों को पानी की किल्लत महसूस हो रही है वे संबंधित पंचायत समिति में मांग करें।

सूखा घोषित करने के लिए अलग अलग मानदंडों के आधार पर हालत का आकलन किया जाता है। प्रशासन ने बताया कि फिलहाल की हालत में 21 दिन से ज्यादा बारिश के गैप का मानदंड साफ दिख रहा है। इसी बीच 8 जून से 30 सितंबर तक के बारिश के फाइनल आंकड़े भी चेक किए जाएंगे। इस दौरान अगर 75 फीसदी से कम बारिश हुई तो वह मानदंड भी देखा जाएगा।

जिलाधिकारी मैनक घोष ने कहा, "पानी की किल्लत दिख रही हो तो संबंधित पंचायत समिति में अर्जी देनी चाहिए। वहां फौरन पंचनामा करके टैंकर शुरू कर दिया जाएगा। पालक मंत्री चंद्रकांतदादा पाटील ने ऐसी मांग आने पर फौरन टैंकर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन भी इसके लिए कमिटेड है। पानी उठाने पर पाबंदी होने की वजह से किसानों को सहयोग करना चाहिए, गणेश विसर्जन नदी या पब्लिक जलस्रोतों में करने के बजाय कृत्रिम कुंड में करना चाहिए।"

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