शरद पवार का सीएम फडणवीस को पत्र: सूखे पर तुरंत फैसला और हेक्टेयरी ५० हजार मदद की मांग
राज्य के कई हिस्सों में बारिश गायब होने से किसान परेशान, राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता शरद पवार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तुरंत सूखा घोषित करने की मांग की
राज्य के कई इलाकों में पिछले कुछ दिनों से बारिश ने मुंह मोड़ लिया है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पानी की कमी की वजह से सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, तूर, मूंग और उड़द जैसी फसलें सूख गई हैं। इसके साथ ही फसलों पर कीड़े और बीमारियों का असर भी बढ़ गया है।
खेती के अलावा पीने के पानी और मवेशियों के चारे की समस्या भी गंभीर हो चली है। राज्य की इस चिंताजनक स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को तुरंत पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने किसानों और ग्रामीण जनता की समस्याओं की तरफ सरकार का ध्यान खींचते हुए सूखा घोषित करने की मांग की है।
पवार ने पत्र में राज्य सरकार से कहा है कि औपचारिक नियमों का इंतजार किए बिना राज्य में तुरंत सूखा घोषित किया जाए। साथ ही उन्होंने कुल नौ बड़ी मांगें रखी हैं, जिनमें किसानों को १ रुपये में फसल बीमा, प्रति हेक्टेयर ५० हजार रुपये की मदद, पूरी कर्जमाफी और छात्रों की पूरी शिक्षा फीस माफ करने जैसी मांगें शामिल हैं। साथ ही सूखा प्रभावित इलाकों में तुरंत चारा छावनियां शुरू करने की भी मांग की गई है। पवार ने कहा है कि ग्रामीण इलाकों में जनजीवन संकट की कगार पर है और सरकार को इस पर तुरंत सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
पत्र में दी गई मुख्य मांगें इस तरह हैं: पहला, हालात की गंभीरता देखते हुए औपचारिक नियमों का इंतजार किए बिना तुरंत सूखा घोषित किया जाए, और गंभीर स्थिति वाले तालुकों को तुरंत सूखे जैसी स्थिति वाला घोषित कर सूखे की सुविधाएं दी जाएं। दूसरा, किसानों को हेक्टेयर पीछे कम से कम ५० हजार रुपये मदद दी जाए, और खेत मजदूर परिवारों को भी हर एक को २५,००० रुपये की खास मदद दी जाए।
तीसरा, आर्थिक संकट में फंसे किसानों को राहत देने के लिए कर्जमाफी योजना तुरंत लागू कर फसल कर्ज उपलब्ध कराया जाए। नियमित कर्ज चुकाने वाले किसानों का प्रोत्साहन अनुदान ५० हजार से बढ़ाकर १ लाख रुपये किया जाए। साथ ही २०२५-२६ में फसल कर्ज लेकर इस बार बकाया हुए किसानों को भी कर्जमाफी योजना में शामिल किया जाए। चौथा, १ रुपये में फसल बीमा योजना पहले से लागू करते हुए पहले छूटे सभी ट्रिगर भी पीछे से लागू कर किसानों को बीमा सुरक्षा दी जाए, और पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के लिए घोषित हेक्टेयरी १७ हजार रुपये की फसल बीमा मदद भी तुरंत बांटी जाए।
पांचवां, सूखे जैसी स्थिति वाले तालुकों में रोजगार गारंटी योजना के जरिए खास योजना चलाकर खेती और जल संरक्षण से जुड़े काम कराए जाएं, और बगीचे बचाने के लिए टैंकर व्यवस्था शुरू की जाए। छठा, पीने के पानी की किल्लत वाले गांवों का तुरंत सर्वे कर जरूरत के मुताबिक सरकारी टैंकर शुरू किए जाएं, चारा छावनियां शुरू की जाएं और मवेशियों के लिए पानी व पशु चिकित्सा सेवा दी जाए। सातवां, सूखे में लोड शेडिंग की समस्या बढ़ने से बिजली ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए ऊर्जा विभाग खास मुहिम चलाए। आठवां, हर जिले में बारिश, फसलों की हालत, पानी की किल्लत, चारे की उपलब्धता और मवेशियों की स्थिति पर रोज नजर रखने के लिए राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम शुरू किए जाएं। नौवां, सूखे जैसी स्थिति वाले तालुकों के स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में सिर्फ परीक्षा फीस नहीं बल्कि छात्रों की पूरी शिक्षा फीस माफ करने का फैसला तुरंत लिया जाए।
पवार ने कहा है कि किसान, खेत मजदूर, मवेशी और ग्रामीण जनजीवन पर बनी इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री इन मांगों पर सकारात्मक फैसला लेकर तुरंत जरूरी कदम उठाएंगे, यह उम्मीद है।
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