शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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नागपुर में पानी की कटौती की तैयारी, जलाशयों में पिछले साल से आधा पानी, नगर निगम ने शुरू किया काम

नागपुर में पानी की कटौती की तैयारी, जलाशयों में पिछले साल से आधा पानी, नगर निगम ने शुरू किया काम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

राज्य सरकार ने जल वितरण में 10 प्रतिशत कटौती के निर्देश दिए हैं। तोतलाडोह और कन्हान में पानी घटा है और नगर निगम ने तैयारी शुरू कर दी है।

नागपुर में आने वाले दिनों में पानी की किल्लत और बढ़ सकती है। तोतलाडोह और कन्हान जलाशयों में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है और इन दोनों में पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम पानी बचा है। राज्य सरकार ने जल वितरण में 10 प्रतिशत कटौती करने के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद महानगरपालिका ने तैयारी शुरू कर दी है। कटौती कब से और किस अनुपात में लागू होगी, इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

महापौर नीता ठाकरे के मुताबिक सरकार की तरफ से पानी कटौती के निर्देश मिले हैं। उन्होंने बताया कि कटौती का फैसला लेना जरूरी हो गया है, लेकिन उसकी सटीक मात्रा तय करने के लिए विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। शनिवार को प्रभारी मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले स्थिति का जायजा लेंगे।

सूत्रों के अनुसार प्रभारी मंत्री बावनकुले की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठक के बाद इस बारे में फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल जल संसाधन विभाग के निर्देशों पर अमल को लेकर प्रशासन के स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है।

इस मानसून सीजन में जिले में औसत बारिश की सिर्फ 64 प्रतिशत बारिश दर्ज हुई है। कम बारिश और अल नीनो के असर से राज्य के जलाशयों पर दबाव बढ़ा है। इसी को देखते हुए सरकार ने कहा है कि उपलब्ध पानी के बंटवारे में पीने के पानी को सबसे ऊपर रखा जाए और 10 प्रतिशत हिस्सा आपातकालीन जरूरतों के लिए आरक्षित रखा जाए।

नागपुर को तोतलाडोह और कन्हान से रोजाना करीब 740 एमएलडी कच्चे पानी की आपूर्ति होती है। लेकिन इसमें से लगभग 259 एमएलडी पानी हर दिन बिना राजस्व के बर्बाद हो जाता है। इस नुकसान की प्रमुख वजहें पाइपलाइनों में रिसाव, पानी की चोरी, अवैध नल कनेक्शन और गैर-बिलिंग बताई गई हैं।

अगर शहर में 10 प्रतिशत कटौती लागू होती है, तो रोजाना की आपूर्ति में करीब 74 एमएलडी की कमी आएगी। इसका असर लोगों को मिलने वाले पानी पर पड़ सकता है। ऐसे में एक दिन छोड़कर पानी देने या कम दबाव से सप्लाई करने जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं।

महानगरपालिका का दावा है कि पाइपलाइनों की मरम्मत और अवैध कनेक्शनों को नियमित करने से रोजाना 50 एमएलडी पानी बचाया जा रहा है। फिर भी जलाशयों में पिछले साल से आधे से भी कम पानी होने और हर दिन 259 एमएलडी के नुकसान को देखते हुए यह बचत काफी नहीं मानी जा रही है।

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